क्या 25 जुलाई 2001को फूलन देवी की हत्या में पारिवारिक करीबियों का हाथ था ? एक कड़वा सच

अलीगढ़, 16 जुलाई 2017, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो। 16 साल पहले, 25 जुलाई 2001 को केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की बीजेपी सरकार के दौरान, चालू संसद सत्र के समय अपने निवास 44 अशोका रोड पर भोजनावकाश के समय शेर सिंह राणा के द्वारा कार से उतरते समय फूलन देवी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।
फूलन देवी जब जेल में थीं, उनके परिवार को दिल्ली से एक व्यक्ति, जिनका नाम चौ हरफूल सिंह कश्यप था, वे ग्वालियर जेल में जाकर फूलन देवी का हाल जानने जाते रहते थे और उनकी माँ व बहनों की पैसों से मदद करते रहते थे। चौ हरफूल सिंह कश्यप जी को फूलन देवी ने अपना चाचा घोषित कर रखा था। चौ हरफूल सिंह कश्यप जी ने अपनी पुलिस की नौकरी से भी रिटायरमेंट ले लिया था और नई दिल्ली लोक सभा क्षेत्र से आडवाणी के खिलाफ फूलन देवी को चुनाव भी लड़ाया था। चौ हरफूल सिंह कश्यप के इस त्याग की वजह से ही फूलन देवी 1994 में जेल से रिहा होने के बाद चौ हरफूलसिंह कश्यप जी के घर दिल्ली में रहीं।
जब फूलन देवी ग्वालियर जेल में थीं, तभी फ्रांस की एक लेखिका ने उनके ऊपर एक किताब लिखी। उस किताब की रॉयलिटी के 1 करोड़ रुपये फूलन देवी को मिले और उसी दौरान शेखर कपूर की बैंडिट क्वीन नामक फ़िल्म भी प्रदर्शित हुई, जिसके बदौलत 25 लाख रुपये फूलन देवी को मिले।
फूलन जी जब 1994 में जेल से रिहा हुईं और उनके नाम का डंका पूरी दुनिया में बाज़ रहा था, तो हर कोई उनसे जुडना चाहता था। लेकिन जब वह अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर यानी दवंगों द्वारा सताई जा रही थीं और चम्बल के बीहड़ में रहती थीं तब कोई उनकी मदद नहीं करता था।
1994 में उत्तर प्रदेश में जब मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी, तो तत्कालीन पशुधन एवं मत्स्य मंत्री स्व. मनोहर लाल जी ने 20 जनवरी 1994 को मुलायम सिंह यादव के सम्मान में बेगम हजरत महल पार्क लखनऊ में एक विशाल सभा का आयोजन किया। जिसमें निषाद वन्स की सभी जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण और फूलन देवी की रिहाई की मांग मुख्य मंत्री के सामने रखी गयीं।
1994 से फूलन देवी नेताओं और लालची लोगों की पहली पसंद बन गई। मुलायम सिंह यादव ने अपने वोट बैंक के रूप में इस समाज को 4 बार पूरी ताकत से दूहा और अपना पूरा कुनवा अरबपति, खरबपति बना लिया। लेकिन आरक्षण आज वहीं खड़ा है, जहाँ 1994 में था। फूलन देवी की माँ आज भी उसी स्थिति में है, जहाँ 1994 में थीं।
1994 में मुलायम सिंह यादव के बाद सबसे बड़ा लाभ फूलन देवी के पति से आज अरबपति बने उम्मेद सिंह कश्यप को हुआ। जो खुद एक शादीसदा होते हुए भी फूलन देवी को अपनी धनलालसा में फसाकर दूसरा विवाह करने को लालायित हुए और कामयाब भी हुए। आज फूलन देवी जी की अधिकांश संपत्ति पर जो अरबो रुपये की है, उम्मेद सिंह कश्यप का कब्जा है। फूलन देवी की माँ आज बीपीएल कार्डधारी हैं, उनकी जिस जमीन पर फूलन देवी के बचपन में दवंगों का कब्जा था आज भी है। फूलन देवी की माँ और एक बहन गुड़ा का पुरवा, जिला जालौन में आज भी एक टूटे छप्पर में गरीबी की हालत में रह रहे हैं।
चौ हरफूल सिंह के परिवार ने बहुत कुछ किया, लेकिन उम्मेद सिंह कश्यप ने सबसे पहले, चौ हरफूल सिंह कश्यप जी को ही फूलन देवी से दूर किया।
आज भी कुछ चालाक लोगों को फूलन देवी में लालच छिपा हुआ है। ऐसे लोग जो कभी फूलन देवी के लिए जीते जी कुछ नहीं कर पाए, मरने के बाद भी आज तक सीबीआई की जाँच और उनकी माँ बहन की मदद नहीं कर रहे हैं और नही कभी इसके लिए कोई आन्दोल किया, ये धूर्त लोग अब 25 जुलाई 2017 को उनका सहादत दिवस मनाने का ढोंग कर रहे हैं और फूलन देवी की आत्मा को अशांति पहुंचा रहे हैं।
उम्मेद सिंह कश्यप की एक रिस्ते की बहन उमा कश्यप ही, फूलन देवी के हत्यारे शेरसिंह राणा को, 23 जुलाई 2001 को 44 अशोका रोड पर लेकर आई थी। शेरसिंह ने पूरी रेकी करके 24 और 25 जुलाई के बीच की रात को फूलन देवी की कार को खराब कर दिया था औऱ 25 जुलाई को अपनी कार से संसद छोड़ कर भी आया था और इसके बाद भी दोपहर के लंच में लेने संसद भवन गया, और उसके नापाक इरादों को नहीं पहचाना। और उसका परिणाम हम सबके सामने है।
फूलन देवी के हत्यारे को जिस दिन जेल से रिहाई मिली उस दिन उम्मेद सिंह कश्यप विदेश में सैर कर रहे थे। शेरसिंह राणा ने अपना जुल्म कबूल किया, और कहा कि हाँ मैने ही फूलन देवी का कत्ल किया है। उसके बाद हत्या स्वीकार कर चुके हत्यारे शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद पहली बार सुनाई गई। आज तक उसके खिलाफ उम्मेदसिंह कश्यप ने फांसी की सजा के लिए एक भी आन्दोल नहीं किया और ना ही उनकी संपत्ति के लिए एक दूसरे से अलग होकर कई पार्टियां और संगठन चलाने वाले उनके अन्य रिस्तेदारों ने किया।
कहा तो यहाँ तक जाता है कि फूलन देवी अपनी संपत्ति को उम्मेदसिंह कश्यप के अलावा अपनी सभी बहन और भाइयों को भी देना चाहतीं थी। और जिनको ये सम्पत्ति से ज्यादा प्यार था या नहीं चाहते थे कि ये संपत्ति किसी भी सूरत में उनके अलावा अन्य को मिले, ने भी दुश्मन से मिलकर फूलन देवी की हत्या की साजिश रची।
एक कटु सत्य है, आज तक जितने भी निषाद वंश के नेता मारे गए हैं चाहे स्व. मनोहर लाल वर्मा हों, चाहे धनीराम वर्मा हों, चाहे रघुवर दयाल वर्मा हों, चाहे जमुना प्रसाद निषाद हों और चाहे जय पाल सिंह कश्यप हों, इन सभी की मौत भी एक जबरदस्त साजिश के तहत ही हुई है और इन मौतों में कोई न कोई सगा संबंधी या करीबी ही में शामिल रहा है।
आज कोई अपने आप को फूलन देवी का दत्तक पुत्र बताकर संगठन चलकर अपनी रोटी सेकने में लगा है, तो कोई उनकी बहन, कोई रिस्तेदार और कोई कुच्छ। अब इन सब धंधेबाजो को फूलन देवी के आदर्श से कुछ लेना देना नहीं है। इनका मकसद केवल समाज को गुमराह करना और अपनी दुकान चलाना है। ये सभी जब एक मंच और एक नेता नहीं चुन सकते हैं, तो समाज को क्या दिशा देंगे। इन धंधेबाजो को अब सबक सिखाने का समय आगया है। इनको इनकी औकात बताना होगा। और हर जगह पूछना होगा कि आपने अब तक 16 साल से फूलन देवी के लिए उनकी माताजी के लिए, उनके हत्यारे को फाँसी की सजा दिलाने के लिए, उनकी मौत की सीबीआई जांच के लिए क्या किया और अगर कुछ किया है तो उसका अब तक का क्या रिजल्ट रहा है। अगर नहीं किया है तो आज सहादत दिवस मनाने का क्या औचात्य है। क्या समाज के अन्य नेताओं को भी मरवाने के लिए, किसी से कोई समझौता तो नहीं कर रखा है।
अब वक्त है, एक संघर्षशील नेतृत्व को स्वीकार करके निषाद वन्स की सभी जातियों के कल्याण के लिए निषाद पार्टी का साथ देकर, निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल की सरकार बनाई जाय और फूलन देवी सहित सभी निषाद वन्स के नेताओं की मृत्यु की जांच सीबीआई से कराई जय।
पिछले वर्ष 25 जुलाई को गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ के इशारे पर फूलन देवी की मूर्ति नहीं लगने दी गई और इन दलालों ने वोट बीजेपी को देकर सरकार बनबाई है। आज निषाद वन्स के अधिकारों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा छीना जा रहा है। इसलिये 25 जुलाई 2017 को फूलन देवी जी के सहादत दिवस को सभी जिलों में निषाद वन्स के अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाय और प्रदर्शन किया जाय। तभी फूलन देवी की आत्मा को शान्ति मिलेगी और समाज को इन समाज तोड़क से छुटकारा मिलेगा।
जय निषाद राज
वीरांगना फूलन देवी अमर रहे।

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