क्या सवा सौ करोड़ लोगों में सिर्फ 3.60 करोड़ लोग ही आयकर देते हैं..!

एकलव्य मानव संदेश, 1 जुलाई 2017। सरकार का रोना है कि सवा सौ करोड़ लोगों में सिर्फ 3.60 करोड़ लोग ही आयकर देते हैं..!

इससे लोगों के दिमाग में पहला संदेश यही जाता है कि सारे देशवासी टैक्सचोर है..!

लेकिन सरकार बड़ी ही सफाई से यह छिपा जाती है कि,
- सवा सौ करोड़ में 43 करोड़ लोग तो 18 साल से कम आयु के हैं जो अमूमन कमाने की स्थिति तक पहुंचे ही नहीं होते!
बचे 82 करोड़!

- इनमें से 75% अर्थात 61.5 करोड़ लोग किसान हैं जिनको सरकार ने स्वयं ही करमुक्त किया हुआ है!

बचे 20.5 करोड़!

- इनमें से लगभग 5.5 करोड़ लोग भूमिहीन हैं और BPL में आते हैं।

बचे 15 करोड़, जो न किसान हैं न BPL में!

- इनमें से वरिष्ठ नागरिक, घरेलू महिलाओं, टैक्सेबल आमदनी से कम आयवालों, 18 साल से अधिक उम्र के बेरोजगारों की संख्या लगभग 11.40 करोड़ निकाल दें।

कुल जमा कमाने वाले बचे 3.60 करोड़!

इतने लोग टैक्स दे ही रहे हैं। फिर चोर चोर का शोर क्यों??
(यहां 'किसानों' का समीकरण जानना भी बहुत दिलचस्प है। इन 'किसानों' में कई ऐसे धनाढ्य हैं जो लक्जरी कार, बंगला रखते हैं, लेकिन करमुक्त हैं! कई नेता और उनके संरक्षित सेठ, फिल्म स्टार तक 'किसान बनने' की फिराक में रहते हैं, सिर्फ इसलिये कि अन्य स्रोतों से हुई आय को किसानगिरी से कमाया बताकर उसपर टैक्स देने से बच सकें!)

3.60 करोड़ लोगों के पैसे से देश चल रहा है, नेताओं की देशी विदेशी तफरीहें होती है, संसद की कैंटीन में करमुक्त वेतन लेनेवाले माननीयों द्वारा सब्सिडी लेकर भिखारियों के रेट में फाइव स्टार भोजन का आनंद लिया जाता है!

फिर भी चोर यही 3.60 करोड़ लोग हैं!!

साभार
ह्र्दयराम निषाद के व्हाट्सऐप पोस्ट से लिया गया