चलो चलो 9 जुलाई 2017 को दिल्ली चलो

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश बीयूरो रिपोर्ट, 4 जुलाई 2017। जो भी नेता, अपने भले के लिये, समाज को अपनी-अपनी जाती के चस्मे से देखतते हैं वो कभी भी निषाद वंश की 567 जातियों को एक नहीं होने देना चाहते हैं। जिनको ये ही नहीं पता है कि, इस देश का प्राचीन नाम ही निषाद देश है, यहाँ की संस्कृति ही निषाद संस्कृति है। जिन जातियों में शादी के बाद कंगन खुलते समय दूल्हा और दुल्हन पानी मे मछली घुमाते हैं वे सभी निषाद संस्कृति की जतियाँ हैं।
डॉ सुधान्द मिश्रा की किताब, वैदिक एवं ब्रह्ममणी धर्म, जो एमए के दुतीय वर्ष के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है। वो कहती है कि आर्यो के आगमन से पूर्व इस देश मे जो संस्कृति थी उसे निषाद संस्कृति से जाना जाता था।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस मार्कण्डेय काटजू और सुधान्द मिश्रा की खंडपीठ कह चुका है कि एकलव्य के वंसज ही इस देश के असली मालिक हैं वाकी आर्यों और आक्रमणकारियों की संतान हैं। आज भी उत्तर प्रदेश सरकार की मुहर के रूप में राजा नल निषाद की मुहर चलती है।
इसलिए जब राज नीति से समाज बर्बाद हुआ है, तो राजनीति से ही उद्दार होगा।
जिस समाज की स्थिति कुत्ते से भी बदतर थी, उसने राजनीति सीख लिया उसका उद्धार हो गया।
जो समाज चोर लूटेरा कहलाता था, उसने राजनीति सीख लिया, एक नाम सभी जातियों का रख लिया आज उद्धार हो गया।
निषाद वंस के लोगों एक खासियत है कि वो असली दुश्मन को न पहचान कर, आपना दुश्मन बढते हुये संगठन को ही मन लेते हैं और जब भी कोई संगठन आगे बढ़ा उसी को तोड़ने लग गए। आज स्व. बाबू जयपाल सिंह कश्यप जी के अनुयायियों के 2000 से ज्यादा संगठन पूरे देश में हैं। पूर्व कैबनेट मंत्री स्व.मनोहर लाल जी के अनुयायियों के 50 से ज्यादा संगठन हैं। आज फूलन देवी जी के नाम पर 200 से ज्यादा संगठन हैं। उनके परिवार के ही लोगों के 4 से 5 संगठन हैं।
सामाजिक संगठन केवल नेताओं का भला करते हैं, इसीलिए नेताओं ने अपने अपने अलग अलग संगठन अलग अलग जातियों के नाम पर बना लिए हैं। क्योंकि ये संगठन कभी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, केवल चुनाव के समय किसी न किसी राजनीतिक दल को समर्थन देकर पैसे कमाने का काम करते हैं।
जागो।
आज राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद नाम का एक विश्वविद्यालय खुला है जो आपको एकता के सूत्र में बांधकर, राजा बनाने के लिये दिन और रात कार्य कर रहा है। उसके प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एक दिन और 3 दिन का प्रशिक्षण लेकर, निषाद वंश की विभिन्न जातियों(तुरैहा, धींवर, कहार, मेहरा, बाथम, रैकवार, गोंड, खरवार, बेलदार, कोल, भील, मांझी, चाई, सिंघाड़िया, धुरिया, कीर, भोई, कश्यप, मल्लाह, केवट, बिन्द, लोधी आदि ) को उनके पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास की जानकारी, उकने त्याग औऱ बलिदान की जानकारी देकर दक्ष बनाकर, एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया जा रहा है। इसलिए इस कार्यक्रम में एक दिन के लिए जरूर पहुंचे।
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद की राजनीतिक विंग है निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (N.I.S.H.A.D. Party), जिसने अपनी स्थापना के बहुत छोटे से समय में ही 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 6 लाख के लगभग वोट पाकर एक विधायक ज्ञानपुर-भदोई जिले से जिताकर निषाद वंशीयो में खुशी पैदा कर इतिहास रच दिया।
आज पूरे भारत के निषाद वंशीयो में निषाद पार्टी को लेकर एक विशेष प्रकार का उत्साह है और इस पार्टी से जुड़कर कार्य करने के लिए लालायित हैं। इसीक्रम में 9 जुलाई को 2017 को नई दिल्ली में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। जो भी लोग - मध्यप्रदेश, राजिस्थान, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और पार्टी से जुड़कर कार्य करना चाहते हैं, वो 9 जुलाई को दिल्ली जरूर पहुंचे। अधिक जानकारी के लिए और अपना नाम व पता भेजने के लिए 9415261898 पर सम्पर्क करें।
उपरोक्त कार्यक्रम में प्रशिक्षण, निषाद वन्स के महान दार्शनिक और प्रणेता और पार्टी व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय कुमार निषाद जी द्वारा दिया जायेगा।
जय निषाद राज
मा.डॉ संजय कुमार निषाद जिंदाबाद
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद जिंदाबाद
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल जिंदाबाद
निवेदक
डॉ जसवन्त सिंह निषाद
(अध्यक्ष एकलव्य प्रान्त राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद एवं प्रभारी मध्यप्रदेश)
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