जातीय नारे की जगह सामूहिक नारा लगाने से ही एकजुटता बड़ती है

सीतापुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर, 31 जुलाई 2017। जय बिंद समाज न कहे बल्कि जय निषाद कहे या जय निषाद राज या जय मछुवा समाज कहे। पूरे निषाद कश्यप समाज को एकजुटता एकरूपता करने वाली बात होनी चाहिए न कि संकीर्ण परक बात चीत हो। इस से समाज की ताकत में बिखराव आता है। समाज में एक गलत सन्देश जाता है। बड़ा दुःख लगता है जब पढ़े लिखे बुद्धिजीवी वर्ग संकीर्ण परक लेख या प्रतिक्रिया देता है। याद रखे यदि हम सामाजिक राजनैतिक शैक्षणिक आर्थिक रूप से सशक्त होना चाहते है तो  निषाद या मछुवा समाज के प्रत्येक उपजातियो को आपस में रोटी बेटी का रिश्ता कायम करते हुए आपस में सामाजिक और राजनैतिक रूप से एकजुटता का परिचय देना ही पड़ेगा। अपनी अपनी अलग अलग उपजातियो का राग अलापने का काम छोड़ना ही पड़ेगा। अन्यथा कोई भी राजनैतिक दल या नेता आपको महत्व नहीं देगा। अपना सामाजिक दृष्टिकोण व्यापक रूप से एकमत करे। आपस में भेद-बिभेद की सामाजिक राजनीति नहीं होनी चाहिए।
फेसबुक के एक पोस्ट बिंदु बाला बिंद द्वारा बिहार के एक बिंद विधायक के कैबिनेट मंत्री बनाये जाने पर दिए जा रहे प्रतिक्रिया स्वरुप मैंने उपरोक्त प्रतिक्रिया लिखा।
इंजी. अशोक कुमार सहानी
सीतापुर