ब्रह्ममणों के युग का पर्दाफाश

बाह आगरा, एकलव्यमानव संदेश के लिए नंद किशोर वर्मा का संकलित लेख, 14 जुलाई 2017।
ब्राह्मणोँ के  " युगों " का  पर्दाफाश - -

1- " सतयुग " = जिस युग में केवल ब्राह्मण ही पढ़-लिख सकते थे ।
इसलिये वे जो बोलता थे, वही सत्य समझा जाता था, इसलिये उसे सतयुग कहते हैं ।

2- " द्वापर " = जिस युग में ब्राह्मणोँ के साथ क्षत्रिय भी पढ़ने लगे ।
यानी दो वर्ण पढ़ने लगे इसलिये उसे द्वापर युग कहने लगे ।

3- " त्रेतायुग " = जिस युग में बाह्मण, क्षत्रिय, वैश्य ।
यानी तीनों वर्ण पढ़ने लगे, इसलिये त्रेतायुग कहने लगे ।

4- " कलयुग " = जिस युग में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य के साथ-साथ शूद्र / अछूत भी पढ़ने लगे।
इसलिये इसे कलयुग यानी अशुभ / अधर्म / पाप का युग कहने लगे ।

शुद्रोँ व अछूतों को पढ़ने का मोका देने वालोँ में बुद्ध ,कबीर,  ज्योतिबा फुले, सावित्री बाई फुले, कोल्हापुर के राजा शाहूजी महाराज, बाबासाहेब का रोल मुख्य है इसीलिए वो उनसे नफरत करते है

अब आप खुद समझ जाइये.....

"कलयुग" अर्थात् "कलम-युग" आपके लिये अच्छा है . ?
या
सतयुग, द्वापरयुग, त्रेतायुग
आपके लिए अच्छा था . ?

आप स्वँय चिंतन करके निष्कर्ष निकाले . ! !