सावधान !! अनुशासन हीन कार्यकर्ता लाभदायक की जगह हानिकारक अधिक होता है ?

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर, 24 जुलाई 2017।  हम एक छोटी सी कहानी के माध्यम से समझते हैं।
थानेदार और पीड़ित व्यक्ति की एक कहानी-
एक पीड़ित व्यक्ति अपनी फरियाद लेकर थानाध्यक्ष के पास जाता है। थानाध्यक्ष महोदय उस पीड़ित व्यक्ति की पूरी ईमानदारी से मदद करते हैं और इसी के कारण क्षेत्र के लोग थानाध्यक्ष को धन्यवाद देते हैं और थानाध्यक्ष के इस कार्य की पूरे क्षेत्र में चर्चा होती है।
लेकिन यदि यही थानाध्यक्ष उस पीड़ित व्यक्ति के मदद करने के बजाय, पानी पिलाकर खुद हैवान बन जाए तो लोग क्या कहेंगे ?और यहां तक कि जो अधिकारी उस थानाध्यक्ष का उसके अच्छे क्रियाकर्मों को ध्यान में रखकर प्रमोशन करता रहा वही उच्चाधिकारी उस थानाध्यक्ष को दण्डित भी करता है।
ठीक वही हाल है किसी भी सामाजिक और राजनीतिक संगठन के कार्यकर्ता का होता है। जब तक कोई भी पदाधिकारी व कार्यकर्ता संगठन के  आदेशानुसार, निर्देशों के तहत अच्छा कार्य करता है, तब तक तो वह कार्यकर्ता है और धन्यवाद का पात्र भी है।
यदि जिस दिन से वह पदाधिकारी/कार्यकर्ता संगठन के आदेश व निर्देशों के विपरीत यानी पार्टी को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचाना शुरू करता है, तो उसका हाल भी उसी थानाध्यक्ष के तरह होता है। इसका ध्यान आप सभी कार्यकर्ता को रखना होगा।
सभी सभी पदाधिकारियों को एक बात ध्यान रखनी होगी, राजपाठ लाकर ही समाज की सभी समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकता है। और संगठन की सफलता के लिए अपना दिमाग न लगाकर  केवल पार्टी के अध्यक्ष के दिशा निर्देशों का पालन को प्राथमिकता दें। आज जो आपको अच्छा लगता है जरूरी नहीं कल वो आपको अच्छा लगे। और जो आज अच्छा नहीं लग रहा है, वही कल आपको लगे।
इसीलिए कोई भी कार्य केवल अनुशासन में रहकर ही करें।
आपका अपना साथी

डॉ संजय कुमार निषाद
राष्ट्रीय अध्यक्ष
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल(निषाद पार्टी)
एवं
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद
जय निषाद राज