समाजिक परिवर्तन

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर, 12 जुलाई 2017।
समाजिक परिवर्तन कैसे होगा?
जो मूलनिवासी समाज 6000 जातियों के टुकड़ों में बांटे गए हैं। इन बांटे गए लोगों के संबंध कैसे हैं? एक जाति का दूसरी जाति के साथ अविश्वास का संबंध है, एक जाति का दूसरी जाति के साथ लड़ाई, संघर्ष का संबंध है जो जातियों के बीच आपसी पूर्वाग्रह है। अगर दो अलग अलग जातियों का आपस में लड़ाई, अविश्वास, पूर्वाग्रह एवं संघर्ष का संबंध है तो समाज में परिवर्तन नहीं आ सकता। यदि परिवर्तन लाना है। तो लड़ाई, संघर्ष, पूर्वाग्रह का संबंध खत्म करना होगा। कैसे खत्म होगा? दो जातियों के बीच जागृति लाना होगा, प्रबोधन करना होगा।
      जागृति कैसे लाओगे?
एक जाति का आदमी दूसरी जाति के व्यक्ति के पास जाकर यदि कहता है कि " मेरी जाति आपकी जाति से ऊंची है।"  तो वह दूसरा व्यक्ति कहेगा फिर आप मेरे पास क्यों आए हैं। लोगों में परिवर्तन तभी लाया जा सकता है जब आपके पास समता का, भाईचारे का, विचार हो। यदि आपके पास यह विचार हैं और इसे आप दूसरी जाति के व्यक्तियों के पास लेकर जाते हैं तो दूसरी जातियों का व्यक्ति कहेगा कि यह तो सबकी कल्याण का विचारधारा है। यदि उसकी जाति का कल्याण भी उस विचारधारा में  अंतर्निहित है तो वह दूसरी जाति का व्यक्ति भी आपके साथ जुड़ जाएगा। उसका पूर्वाग्रह दूर हो जाएगा। जाति और जाति के बीच के संबंध हैं। उस संबंधों का पुनर्निर्धारण करना होगा। जब तक जाति और जाति के बीच संबंधों का निर्णय निर्धारण नहीं होगा। तब तक जाति जाति के बीच जो पूर्वाग्रह है, लड़ाई और संघर्ष का जो संबंध है, और विश्वास का जो संबंध है। वह समाप्त नहीं होगा। यदि आपके पास समता, भाईचारा, स्वतंत्रता एवं न्याय की विचारधारा है तो आप लोगों में परिवर्तन ला सकते हैं।
जय निषाद राज
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद जिंदाबाद ।।
निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल जिंदाबाद ।।
मा डॉ संजय कुमार निषाद जिंदाबाद जिंदाबाद ।।