क्या निषाद वंशिय एमएलए, एमएलसी, एमपी, एमपी राज्य सभा और मंत्री में से किसी मे अपने स्वार्थ को त्यागकर आरक्षण और निषाद वन्स की समस्याओं के हल के लिए त्याग पत्र देने को हिम्मत है

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर द्वारा, 19 जुलाई 2017। मायावती जी ने एक शब्द बोला राज्यसभा में जब उन्हें उपसभापति महोदय बोलनें से रोक रहे थे तो उन्होनें कहा कि लानत है मेरा इस राज्यसभा मे रहना जहां पर मै अपने समाज के लिए बोल भी नही सकती को मेरा इस राज्यसभा मे रहना बेकार है और इस्तिफा ले लो इस्तिफा ले लो चिल्लाने लगीं...
      क्या कभी निषाद वंस का प्रतिनिधित्व कर रहे एमएलए, एमएलसी, एमपी, एमपी राज्य सभा और मंत्री में से किसी मे अपने स्वार्थ को त्यागकर आरक्षण और निषाद वन्स की समस्याओं के हल के लिए त्याग पत्र देने को हिम्मत है और क्या इन लोगों ने कभी अपने समाज की हालत को इस कदर विधानसभा, राज्यसभा, विधानपरिषद व लोकसभा में दमदारी से रखा। चाहे वह किसी भी पार्टी से रहा हो।
      आज वह इसलिए दमदारी से बोल पा रही थी क्योंकि उनके पास मजबूत पार्टी रुपी हथियार है- हमारे नेताओं के पास नही है तो वह बेचारा बनकर जीवन यापन कर रहे हैं। वह लोग उन पार्टियों में शेर तो हैं, लेकिन सर्कस के जैसे हैं, जो देखने मे तो शेर होता है लेकिन हर्कत अपने मालिक के इशारे पर करता है...
       मायावती के कथनानुसार जिस जाति मे उन्होनें जन्म लिया केवल उसकी बात करती हैं। लेकिन महामना मा. डा. संजय कुमार निषाद जी सभी अधिकार वंचितों के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं.
     अब फैसला आप लोगों के हाथ मे है क्योंकि भाजपा का सवर्णवाद जारी है और सपा का समाजवाद से अभी होकर गिरे ही हैं...
जय निषाद राज...
महामना मा. डा. संजय कुमार निषाद-जिन्दाबाद!!
निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल-जिन्दाबाद!!
रविंद्रमाणि निषाद
प्रान्तीय अध्यक्ष
गोरखनाथ प्रान्त
उतर प्रदेश।

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