दुश्मन पार्टियों ने संवैधानिक हनन से ध्यान हटाने के लिये कुछ स्वार्थी लोग को निषाद पार्टी के पीछे लगा है-रविंद्रमाणि निषाद

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर द्वारा रविंद्रमाणि निषाद के विचार, 30 जुलाई 2017। कई वर्षों से संगठन और पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं ने बहुत संघर्ष किया और बहुत कष्ट के दिन भी देखे हैं। सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को कोई शिकायत नहीं है पार्टी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष से।
दिन प्रतिदिन कुछ लोगों के द्वारा कभी संगठन के बारे में, कभी पार्टी के रजिस्ट्रेशन के बारे में, कभी चुनाव चिन्ह को लेकर, कभी प्रत्यासियों के सीट बंटवारे को लेकर, काफी विरोध झेलने पड़े। परिणाम यह रहा कि आज जो राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संजय कुमार निषाद जी के नेतृत्व ने कर दिखाया, वो आपके सामने है कि -
विश्व पटल पर आपका एक मज़बूत विधायक आपके साथ है
और
जो समाज पहले टिकट की भीख मांगता था 2017 विधानसभा के चुनाव में टिकट बांट रहा था।
दुर्भाग्य कहे या evm का घोटाला, जिसने हमें ही नहीं माया और मुलायम को मिट्टी में मिला दिया, अगर डॉ साहब चुनाव जीते होते या कुछ और सीट निकली होतीं, तो शायद कितने लोग खुदको डॉ साहब का पुस्तैनी रिश्तेदार बताने लगते और हारने पर खूब महबूब में कमी नजर आ रही है।
साथियो...
2014 में कई लोगो ने संगठन व राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऊपर तरह तरह के इल्जाम लगाए थे, आज वो सब साथ हैं।
जिन्हें नेतृत्व पर भरोसा है वो पारदर्शिता नही देखते।
जो पार्टी व राष्ट्रीय अध्यक्ष पर संशय करे वो पक्का किसी पार्टी का दलाल है।
हमेशा पॉजिटिव स्तर से सोचना लाभदायक होता है
साथियों
       एक सवाल-
क्या सपा, बसपा, कांग्रेस, भाजपा, रालोद व अन्य जितनी भी राजनैतिक पार्टिया हैं वह अपनी रणनीति फेसबुक, व्हाटसैप, न्यूज़ मीडिया, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित करती हैं, कि कार्यालय पर तय करती हैं। उनकी रणनीति गोपनीय होती है, इसीलिए वे सफल हैं।
दूसरी तरफ निषादो की जितनी भी पार्टियां जन्मीं उनके लोगो ने पार्टी की नीतियों को रोड पर बहस कर सभी पार्टियों को रोड पर ला दिया।
     "निषाद पार्टी" और माननीय डॉ संजय निषाद जी की रणनीतियों से पार्टी इस मुकाम तक पहुची है कि आज सभी पार्टीया निषाद पार्टी से भयभीत है। लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि वही लोग जो पूर्व में निषादों की पार्टियों को दीमक की तरह खा गए, आज फिर वही लोग, निषाद पार्टी में भी जो पदाधिकारी तन, मन, धन से समर्पित ही, उनको बहकाने की कोशिश में हैं और पार्टी को बुरा भला कह रहे है।
निषाद पार्टी ने उन सभी निषाद बंधुओ को एक पहचान दी, जिससे उनको लोग देश प्रदेश में लोग जानने समझने लगे, ये महामना डॉ साहब की देन है।
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद व NISHAD पार्टी के संगठनात्मक  कैडर कैम्प में हमेशा ऐनक (नजरिया) और नंबर (दृष्टि) बदलता है। फर्क जो कैडर के कैम्पस में नियमित आता हो, समाज में जाकर काम करता हो।
कोई भी कार्यकर्ता जब तक संगठन के उद्देश्य पूर्ति के लिए काम करे तब तक वह अनुशासित कार्यकर्ता है,
नहीं तो मिट्टी में से आया था फिर मिट्टी में मिल जाता है। पक्का पात्र बनने के लिए तपना पड़ता है, कच्चे पात्र में अमृत भी डालो, अपनें साथ अमृत को भी मिट्टी में मिला देगा।
संगठन का उद्देश्य- सत्ता व व्यवस्था में परिवर्तन एक मात्र लक्ष्य।
विचारधारा- हम मूलवासी महाराज गुह्यराज निषाद  वंशज हैं। सवर्णवादी व्यवस्था छोड़ो। मूलवासी को जोड़े।
सिद्धांत- सामाजिक- जागृति, चिन्तन, दोस्त- दुश्मन की पहचान कर अपने वंश को जोड़ना।
कार्यक्रम- सत्ता हासिल करने हेतु विशाल जागरूकता एवं जागृति कार्यक्रम, विशाल रैली, आन्दोलन, धरना-प्रदर्शन, कैडर कैम्प, मिटींग आदि।
जो अच्छे अनुशासित कार्यकर्ता हैं वह काम कर रहे हैं।
निजी स्वार्थ वाले लोग पेट व परिवार पालन-पोषण व समाज को गुमराह कर पार्टी पर टीका-टिप्पणी में लगें है।
ऐसे लोगों को महाराज गुह्यराज निषाद सदबुध्दी दें।
जिसको जीवन में कुछ करने की तमन्ना हो आगामी कैडर कैम्प में जरूर आये।
दुश्मन पार्टियों का निषाद विरोधी चेहरा, आरक्षण वादाखिलाफी, संवैधानिक हनन जो हो रहा है, उससे लोगों का ध्यान मोड़ने के कार्यक्रम में कुछ गुमराह लोगों को निषाद पार्टी के पीछे पड़े रहने के लिए लगाया हैं। जो निषादो को गुमराह करनें का काम है।
समाज गाँव में रहता हैं गुमराह करने वाले पहले गाँव में जायें तब कीसी  पर टीका-टिप्पणी करें।