निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल(निषाद पार्टी) की बढ़ती लोकप्रियता से भयभीत बीजेपी दे रही है कई संगठनों को अप्रत्यक्ष रूप से मदद

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 18 जुलाई 2017। चर्चा इस बात की भी है कि निषाद पार्टी की बढ़ाती लोकप्रियता से सबसे ज्यादा बीजेपी परेशान है और इसीलिए सुना है आज उत्तर प्रदेश में बीजेपी कम से कम 20 संगठनों को अप्रत्यक्ष रूप से निषाद पार्टी के बढते जनाधार को रोकने के लिए पैसे से भी मदद कर रही है। क्योंकि वे संगठन निषाद पार्टी को जनता से मिल रहे पैसे के सहयोग को ही सबसे ज्यादा कोसते हैं। जबकि यह सर्वविदित है कि बिना पैसे के कोई संगठन नहीं चलता है। 
पिछले लोक सभा चुनाव में बीजेपी ने 12000 करोड़ रुपये केवल प्रचार में ही खर्च किये थे। और उस खर्चे के मुकाबले चाहे वो NCC/समन्वय वादी मोर्चा हो, चाहे वो कश्यप निषाद मेहरा आदिवासी संगठन हो, चाहे बिंद कल्याण सभा हो, चाहे राष्ट्रीय महान गणतंत्र पार्टी हो, चाहे फूलन सेना हो, निषाद विकास संघ हो, चाहे राजिस्थान में कीर सभा हो, इन सभी से सार्वजनिक रूप से पूछना चाहिए कि अगर बिना पैसे के कोई संगठन खड़ा हो सकता है तो 70 सालो में अब तक क्यों नहीं हो सका। आपकी फाइनेंस कौन कर रहा है। आपने उत्तर प्रदेश विधानसभा में किस पार्टी को वोट दिया और क्यों दिया।अगर बीजेपी को दिया तो आज आरक्षण और फूलन देवी के मर्डर केस की सीबीआई जांच कब कराओगे। और अब 2019 के लोक सभा चुनाव में किस पार्टी को वोट दिलाओगे।
ऐसे ही और भी कई सज्जन है, उनमें एक लौटन राम भी हैं, जो हर चुनाव में अलग अलग पार्टीयों के लिये प्रचार करते रहते हैं और फिर रोते हैं कि उसने धोका दे दिया। अभी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की और डोरे डाल रहे थे, जब वहाँ भाव नहीं मिला तो कुछ लाख लेकर सपा का रायबरेली व अन्य जिलों में प्रचार करने लगे। पिछले लोक सभा चुनाव में बीजेपी का प्रचार कर रहे थे और जब शिवपाल सिंह यादव ने लालच दिया तो बीच चुनाव में ही सपा के साथ हो लिए। उससे पहले कांग्रेस के साथ थे।
आज डॉ संजय कुमार निषाद के अलावा किसी भी माई के लाल में एक पार्टी, एक झण्डा, एक नारा, एक चुनाव चिन्ह और एक नेता बनने की ताकत नहीं है। जब तक इन हरामी, लालची, फरेवी और समाज को अपने लाभ के लिए अलग जातियों और उपजातियो में तोड़ने वालों को चौराहे पर नंगा नहीं किया जाएगा, निषाद वन्स को एक सूत्र में नही बाँधा जा सकेगा।
 भारत का प्रचीन नाम निषाद है। आर्यों के आगमन से पूर्व इस देश को निषाद देस कहा जाता था। निषाद कोई जाति नहीं है, भारत की प्राचीन संस्कृति है। जैसे आज भारत की सभी जातियों के लोगों को भारतीय कहा जाता है, पाकिस्तान के अभी जाती धर्म के लोगों को पाकिस्तानी कहा जाता है। अमेरिका के सभी जातियों धर्मों के लोगों को अमरीकन कहा जाता है, वैसे ही प्राचीन भारत के लोग निषाद कहलाते थे (पड़ो, प्रो. श्रीकांत पाठक की पुस्तक, वैदिक एवं ब्रह्ममणी धर्म), सुप्रीम कोर्ट के  चीफ जस्टिस मार्कण्डेय काटजू औऱ सुधानन्द मिश्रा की खंडपीठ का निर्णय, एकलव्य के वंसज ही इस देश के असली मालिक हैं।
क्या ये एक से 4 जातियों के नाम पर संगठन चलाने वाले, बता सकते हैं, ये मल्लाह कहाँ से आये। क्योंकि की मल्लाह अरेबिक शब्द है। और मुगलों ने यहाँ के नाव चलाने वालों को मल्लाह कहा, अरब से मल्लाह नहीं लाये। अरब और इस्लाम में मल्लाह सबसे पवित्र शव्द है (बिस्मिल्लाह ऐ रहमान यानी यह दुनिया 20 मल्लाहों के और अल्लाह रहम से बनी है)। कहार शब्द भी मुस्लिम शासकों का दिया हुआ है। निषाद भारतीय संस्कृति का सबसे पवित्र शब्द है। क्योंकि भारत में पैदा हुए सभी भगवान (राम, कृष्ण, महात्मा बुद्ध, और गुरु गोविंद सिंह, को सहारा कहीं न कही निषाद ने ही दिया)। 
आज जो सैकड़ों जतियाँ/उपजातियां जो निषाद वंश की है उनको खुद नहीं पता कि वो इस जाति के क्यों हैं। क्योंकि शिक्षा से वंचित हो जाने के कारण ये जाती आज आपस में ही एक दूसरे से ऊंची नीची के चक्कर मे एकता के मजबूत सूत्र में नहीं बंध पा रही है। और इनके चालक नेता, जिनकी दुकान ही आपस में विभाजन पर चलती है। वो नहीं चाहते हैं कि समाज एक जुट हो जाय। 
इसलिए आज पूरे देश के बुद्धिजीवी लोगों को अपना व्यक्तिगत लाभ को न देखकर समाज की मजबूती के लिए अपने अहम को त्यागना होगा। और एक बार तन मन धन से बिना किसी हिसाब किताब की परवाह किए निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल यानी (N.I.S.H.A.D. Party )  का साथ देने के लिए आगे आना होगा। जैसे आप अन्य पार्टीयों के नेताओं का, चाहे आपसे आधी उम्र का ही क्यों न हो, उसका स्वागत करते हो, डॉ संजय कुमार निषाद का भी करना होगा।
एक और बात है जो समाज को मजबूत बनाती है उस पर भो सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा। वो है निषाद वन्स की एक जाति से दूसरी जाति में शादी विवाह करके रोटी वेटी का रिश्ता मजबूत करना। मैने जब 1984 में समाज मे पद लेकर कार्य प्रारंभ किया था तो 1986 में पहला कदम मैंने मल्लाह होने के कारण अपनी शादी तुरैहा जाती से की। मेरी कई रिस्तेदारियाँ मल्लाह, बाथम, तुरैहा में हैं और अब अपनी 2 बेटी और 3 बेटों की शादी भी 3 से 5 निषाद वंशिय जातियों में करने की तैयारी में हूं। मेरी बड़ी बेटी एमए (पोलिटिकल साइंस), बड़ा बेटा MBA (फिनांस प्लस नेट क्वालिफाइड एंड सेल्स मैनेजर इन रिलायंस निप्पपोन लाइफ इन्सुरेंस), दूसरी बेटी डिप्लोमा इन ऑप्टेटिमेट्री, दूसरा बेटा (सेवारत ताज ग्रुप ऑफ होटल्स at इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली)  तीसरा और अंतिम बेटा (B. Tech. मेकैनिकल, 3rd सेमिस्टर, AMU अलीगढ़)। मेरे परिवार मे पढ़ाई के अलावा कोई ऐब नहीं है किसी में। यानी पान मसाला पाउडर बीडी गुटखा तम्बाकू सिगरेट दारु गांजा चरस भांग अफीम कोई नशा नहीं करता है। इनकी शादी निषाद वंशी बेटी और बेटियों से ही की जाएगी। 
इसलिए जाती नहीं, मूल वन्स की पहचान को मजबूत बनाने के लिये कार्य कीजिए। निषाद पार्टी को मजबूत किजीये।
जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है, वो कभी इतिहास नही बना सकता है। आज राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के अध्यक्ष डॉ संजय कुमार निषाद जी ने सभी निषाद वंशीयो को एकता के सूत्र में बांधने के लिय अध्ययन करके 11 किताबें लिखी हैं, उनमें एक किताब है भारत का असली मालिक कौन, उसे सभी लोध, बिंद, कश्यप, बाथम, रैकवार, गौंड, धुरिया, मांझी, बेलदार, तुरैहा, मेहरा, मल्लाह, केवट, चाई, आदि को एक बार जरूर पड़ना चाहिए, और कैसे उत्तर प्रदेश और भारत की सत्ता पर काबिज हुआ जाए इसके लिए एक दिन का कैडर भी जरूर करना चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए
डॉ संजय कुमार निषाद जी से डायरेक्ट समपर्क भी करना चाहिए। डॉ संजय कुमार निषाद जी का मोबाइल न. 9415261898 है।
सम्मानित बुद्धिजीव साथियो •••
आज इस देश का युवा परेशान और बेरोजगार है। इन्हें रोजगार चाहिए। हर कोई आता है वादे करता है ओर चला जाता है आखिर कब तक चलता रहेगा। यह सब सच्चाई बहुत कडवी होती है। मै किसी की बुराई नही कर रहा हूँ। सच्चाई को बयान कर रहा हूँ। यदि भाजपा के समर्थक हो, तो ख़ुद से नीचे लिखे सवाल पूछिए और जवाब ना हो तो अपनी सरकार से ये सवाल ज़रूर पूछिए..!           
तीन साल में 
1- कितने करोड युवाओं को रोजगार दिया ?
2- गंगा मैया कितनी साफ हुई ?
3- बुलेट ट्रेन के कितने कोच तैयार हुए ?
4- मेक इन इंडिया का क्या परिणाम रहा ?
5- कितने दागी नेता जेल गए ?
6- धारा 370 पर क्या हुआ ? 
7- कितने कश्मीरी पंडितों को उनके घर मिले ?
8- डीजल पैट्रोल कितने सस्ते हुए ?
9- मंहगाई कितनी कम हुई ?
10- आम जनता के लिए क्या किया गया ?
11- लाहौर और करांची पर कहाँ  तक कब्जा किया ?
12- सेना को कितनी छूट दी गई ?
13- चीन थर थर कांपा क्या ? 
14- देश ईमानदार देशों की श्रेणी में आया क्या ? 
15- किसानों की खुदकशी बंद हुई क्या ? 
16- जवानों का खाना सुधरा क्या ? 
17- बिहार को 125 लाख करोड़ का पैकेज दिया क्या ? 
18- अलगाववादी नेताओं की सुविधाएं बंद की क्या?
19- ओवैसी और वाड्रा जेल गए क्या ? 
20- मोदी के विदेशी दौरों से कुछ फायदा हुआ क्या ? 
21- राम मन्दिर बना क्या ?
22- गुलाबी क्रांति गौ हत्या रुकी क्या ?
23- डॉलर का मूल्य रूपये के मुकाबले कम हुआ क्या ?
24- कितने स्मार्ट सिटी तैयार हो गये ?
25- कितने गाँवों की काया पलट हुई सांसदों के गोद लेने से ?
26- महिलाओं पर अत्याचार रुक गया क्या ?
27- बीफ एक्सपोर्ट में भारत को एक नम्बर किसने बनाया ?
28- 100 दिनों के अंदर विदेशों से काला धन आया क्या ?
29- कितने लोगों को 15 लाख मिले ?
30- नोटबन्दी से आतंकवाद और नक्सलवाद की कमर टूटी क्या ?
31- देश के अंदर से घूसखोरी बंद हो गई क्या ?
32- भारत में कितनी खुशहाली आई ?
33- स्वच्छता अभियान का क्या परिणाम रहा ?
विचार करें  और उचित कदम उठायें। जवाब मिलें तो मुझे भी बताइएगा।

आपका अपना साथी
जसवन्त सिंह निषाद
संपादक/प्रकाशक
एकलव्य मानव संदेश
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