गोरखपुर से चली निषाद (निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल) की क्रांति अब आशा की नई किरण बनी, सपा,बसपा, भाजपा के निषाद नेता भी अब पार्टीयों को छोड़ कर जुड़ने लगे कारवां में

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 29 जुलाई 2017। जिला गोरखपुर मे सहजनवा विधान सभा से लेकर पिपराईच विधान सभा मे हो रहे निषाद समाज के जुल्म को सुनकर जगह-जगह घटना स्थल पर पहुँचते निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. डॉ संजय कुमार निषाद जी के काफिले में अपनी अपनी गाड़ियों से तमाम निषाद समाज के बहुबली नेताओं ने साबित कर दिया कि वे सपा, बसपा, भाजपा, कांग्रेस जैसीे तमाम पार्टियों को लात मार कर निषाद पार्टी के साथ जुड़कर समाज पर हो रहे अत्याचार की लड़ाई, राष्ट्रीय अध्यक्ष  मा. डॉ संजय कुमार निषाद जी के साथ मिल कर लड़ने को तैयार हैं।
ये क्रांतिकारी परिवर्तन ही निषाद वंशीयो को नए युग में लेजाने के लिए एक मजबूत प्लेट फॉर्म तैयार करेगा। क्योंकि डॉ संजय कुमार निषाद ने साबित कर दिया है कि जिस समाज को उसके इतिहास की सही जानकारी मिल जाती है वो ही क्रांति करने में आगे निकल कर परिवर्तन लाता है।
आज बीजेपी, बसपा, सपा कांग्रेस पार्टियां निषाद (निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल) पार्टी की बढ़ती ताकत से घवराई हुई हैं और वे नहीं चाहती हैं कि निषाद वन्स की सैकड़ों जतियाँ एक जुट हो जाएं। इसीलिए ये पार्टीयां अब निषाद वन्स की जातियों को कहीं कश्यप, कहीं रैकवार, कहीं मेहरा, कहीं बिन्द, कहीं धींवर, कहीं गोंड, कहीं कहार, कहीं कीर, कहीं भोई, कहीं चंद्र वंशी कहार, कहीं कश्यप राजपूत, कहीं लोधी राजपूत, कहीं तुरैहा, कहीं खरवार, कहीं मल्लाह, कहीं केवट, कहीं माझी, कहीं चाई, कहीं बेलदार कहीं मछुआ आदि-आदि नामों के संगठन अपनी-अपनी पार्टी के नेताओं द्वारा समय समय पर खड़ा कराकर इस एकता को कुचलने ने का काम करती रही हैं।
डॉ संजय कुमार निषाद जी निषाद वन्स की जातियों को एकजुट करने के लिए एक प्रूव्ड (सत्यापित) सूत्र प्रयोग में लाये हैं। उनके मूल संगठन राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद द्वारा चलाये जा रहे एक दिवसीय और तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविरों ने निषाद वंशियों को यह बात पूरी तरह से समझाने में प्रारंभिक कामयाबी हासिल कर ली है कि निषाद कोई जाति नहीं है। निषाद भारत का प्राचीन नाम है। जैसे-जैसे इस देश में आक्रमण करी आते गए और इस देश के राजाओं महाराजों को मार कर समय-समय पर अपना-अपना राज्य स्थापित करते गए। निषाद संस्कृति और देश को बदल कर अपनी-अपनी संस्कृति थोपते गए और भारत का नाम बदलते गए, जैसे आर्यावर्त, हिंदुस्तान, ब्रटिश इंडिया, इंडिया।
आज आजादी के 70 साल बाद भी मूलवासी अत्यचार, बलात्कार, शोषण और लूटपाट का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इनके नेता बीजेपी, बसपा, सपा कांग्रेस में बंधुओं की तरह से ही रहकर अपनी आंखों के सामने ये सब देख रहे हैं। अब निषाद पार्टी आशा की एक नई किरण लेकर आई है। जो आने वाले समय में विशाल उजाले की ओर निर्बलों को लेकर जाएगी और अत्याचार, शोषण, भुकमरी, लूटपाट और बलात्कार मिटाकर, मानवता का शासन स्थापित करेगी।
जय निषाद राज।
डॉ संजय कुमार निषाद जिंदाबाद
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल जिंदाबाद
आपका अपना साथी
जसवन्त सिंह निषाद

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