आओ सपथ लेते हैं

एकलव्य मानव संदेश हम सभी के लिए
             आओ कसम खायें
1.       मै "गरीब" पैदा हुआ, 
   ये मेरे बस  की बात नहीं थी।
  पर मैं गरीब रह कर मरूँगा नहीँ                                                ये मेरे बस की बात है।
2.     मैं "अशिक्षित" समाज में पैदा हुआ, ये मेरे बस की बात नहीँ  थी,
पर मैं अशिक्षित रह के मरूँगा नहीं,
ये मेरे बस की बात है।
3.      मैं "अन्धविश्वासी" समाज में पैदा जरूर हुआ, ये मेरे बस की बात नहीं थी। पर मैं अन्धविश्वासी रहकर मरूँगा नहीं, ये मेरे बस की बात है।
इस संदेश को हर साथी तक पहुंचाने का प्रशंसनीय काम करें ताकि शपथ को ग्रहण करने के बाद उसमें अपनी ""दरिद्रता, अशिक्षा और अन्धविश्वास"" को नष्ट करने का जज्बा बरकरार रहे।
इंजी. पीपी श्रीवर
मेरठ।