भगवान और मंदिर नहीं, सत्ता बदलती है देशवाशियों का भविष्य ?

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश एडिटोरियल, 21 जुलाई 2017। जबसे भारत में किसी चालक व्यक्ति ने भगवान की कल्पना की है तब से आज तक भगवान ने लोगों का कोई कल्याण किया हो, यह शायद ही कोई जानता हो। लेकिन भगवान के पुजारियों का सत्ता से लगाव प्रारम्भ से ही रहा है। और मठ मंदिर के संचालक मजे में रहे हैं। और आम जनता का मंदिर और सत्ता द्वारा शोषण बरकरार रहा है। लेकिन जब-जब सत्ता और मंदिर के संचालक अलग-अलग रहे हैं, तब-तब आम जनता की प्रगति तेज हुई है। और ये प्रगति मंदिर के मठाधीश को हमेशा बुरी लगती रही है । और गरीबों की सत्ता को राक्षसी सत्ता कहकर मंदिर के मठाधीशों द्वारा धर्म के सहारे खत्म किया गया है।
जैसा लालू यादव हो, मायावती, अखिलेश और मुलायम सिंह की सत्ता में दलितों और पिछड़ों को काफी आगे बढ़ने का मौका मिला। जो मंदिर और मंदिर के सहारे अपनी सत्ता चलने वालों को हमेशा खटका। इनकी मजबूत होती सत्ता को इन मंदिर के सहारे सत्ता चलाने वालों ने पहले गैर मंदिर वालो की सत्ता में अपनी पहुंच बड़ाई और फिर इनको ही एकदूसरे का दुश्मन बनाकर आज खुद मंदिर के पुजारी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनगए। और गरीब पिछड़े अब मंदिर के चक्कर लगाने में व्यस्त हो गए।
मंदिर का भगवान जो पत्थर का है उससे अपने पढ़े लिखे बेटे बेटियों की नौकरी की भीख मांग रहे हैं। और अब मंदिर वाले सरकारी नौकरियों को कम करके गरीब जनता को कौशल विकास के सहारे भूखे भेड़िये रूपी पूंजीपतियों और ठेकेदारों के हवाले करके आपनी सत्ता को और मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है ये मंदिर वालों की सरकार। क्योंकि सरकारी नौकरी का मालिक जनता खुद होती है और पूंजीपतियों और ठेकेदारों के यहाँ नौकरी में मालिक ठेकेदार और पूंजीपति। मालिक अपने नौकर पर कब्जा रखता है और उसे केवल जीने भर को खाने के लिए ही देता है, अगर ज्यादा तनख्वाह दी तो नौकर मजबूत हो जायेगा और पूंजीपति से बराबरी करने लग जायेगा। सत्ता पर कब्ज़ा करने की सोचने लगेगा। इसीलिय पूंजीवाद मंदिर को अपना पैसा देकर जनता को भगवान के चक्कर में फ़साये रखने में मठाधीश को सहारा देते हैं।
इसलिए हे गरीबो, निर्बलो, शोषितो अगर आप मंदिर के चक्कर लगाते रहोगे और मंदिर के मठाधीश सत्ता में पहुचते रहेंगे तो आपका कल्याण कभी नहीं होगा। क्योंकि दुनिया में भगवान नाम की कोई चीज नहीं है, इंसान ही इंसान को भगवान के चक्कर में पीस कर मौज उड़ाते हैं और जो मंदिर में अपना भाग्य ढूंढते हैं उनको ये भगवान वाले ही लतियाते हैं।
जगो सत्ता ही निर्बलों को बल प्रदान करती है, मंदिर नहीं।
मंदिर वाला खुद आपके सामने ही आज सत्ताधारी बनकर मौज उड़ा रहा है। अगर भगवान उसे ये मौज देता तो वह कभी भी सत्ता की ओर नही जाता।
हे शोषितो, आपका कल्याण करने के लिए ही निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल का उत्तर प्रदेश से डॉ संजय कुमार निषाद जी के नेतृत्व में उदय हो चुका है। आओ सत्ता पर आपकी हिस्सेदारी दिलाएं, और आपके बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएं।
जय निषाद राज
जय हिरण्यकश्यप
नोट:- 23 जुलाई को मध्य्प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के ग्राम नंदन वाडा, शंकरगढ़, तहसील मोहनगढ़ में 11बजे से निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) की पहली सभा होने जा रही है। आप भी जरूर पहुंचे।