पुलिस ने निर्धन परिवार को बनाया अनाथ, 2 दिन कड़ी यतना के बाद, सीधा स्वर्ग को पहुचाया

फतेहपुर, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो चीफ मुन्ना कश्यप की रिपोर्ट, 18 अगस्त 2017। फतेहपुर, उत्तर प्रदेश की पुलिस के एक थाना प्रभारी ने एक गरीब निषाद को इस कदर मारा कि उनके प्राण पखेरु ही उड गया। क्या इसके लिये उत्तर प्रदेश सरकार की लचर कानून व्यवस्था जिम्मेदार नहीं है? मृतक के तीन मासूम बच्चे  और पत्नी हैं। यह घटना उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद के ललौली - बिंदकी की है। मृतक ग्राम प्रधान का ट्रेक्टर चालक था। मामूली विवाद में पुलिस उसे और एक कथित पीड़ित को थाने ले आयी। कथित पीड़ित से सब्जी ठेला में टक्कर की तहरीर ले ली गयी और थाने से दफा कर दिया गया और ट्रैक्टर चालक निषाद को पुलिस के दारोगा और सिपाही अपनी शैली में दो दिन थाने में संवाद करते रहे। शायद उसे छोड़ देते, लेकिन उसकी पत्नी पुलिस के जलपान के लिए पांच हजार नहीं जुटा सकी। दो दिन बाद भयंकर यातना से वह बेहोश हो गया। पुलिस उसे जिला अस्पताल ले गयी। इधर ग्राम प्रधान ने पीड़ित के परिवार को धमकाया कि किसी से यह मत बताना कि पुलिस ने मारपीट की है नहीं तो तुम्हारा खानदान साफ कर देंगे। तीसरे दिन जब अस्पताल लेजाया गया तो डॉक्टर्स ने इलाज के दौरान मृत घोषित कर दिया। इस तरह एक गरीब परिवार को अनाथ कर दिया गया। इसके बाद मृतक की पत्नी प्रधान के पास पुनः पहुंची तो प्रधान जी ने पुनः धमकाया और नमाज के बहाने निकल लिए। मृतक के परिजन किसी तरह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वहां मृतक की मृत्यु हृदयगति रुकने के कारण बताई गयी। जबकि मृतक के शरीर पर चोट के निशान पुलिसिया जुर्म की कहानी कह रहे थे।
क्या गरीबों के लिए मानवाधिकार, संविधान, जनतंत्र और शाइनिंग इंडिया जैसे शब्द कोई अर्थ रखते थे। यदि आप तस्वीर गौर से देखें तो चिन्तन करें कि जिस परिवार की बच्चों के पास पहनने के ढंग के कपड़े नहीं हो, माँ का शरीर कुपोषण की गवाही दे रहा हो, ऐसे  परिवार का जीवन आगे कैसे कटेगा।