चुनाव में जीत के लिए 50% वोट अनिवार्य किया जाए- डॉ सुभाष कश्यप

लखनऊ,एकलव्य मानव संदेश के लिये पी के त्रिपाठी का लेख साभार सहित, 22 अगस्त 2017 : आपातकाल में जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानी अब देश में भरत गांधी के साथ मिलकर राजनीति सुधारने का काम करेंगे। श्री गांधी ने देश के अनुकूल वैकल्पिक राजव्यवस्था व अर्थव्यवस्था का स्वदेशी ढ़ांचा तैयार किया है। इन विषयों पर चार दर्जन से ज्यादा किताबें लिखी है और गत 25 सालों से ये काम करते रहे हैं। उनके कुछ प्रस्तावों को सौ से ज्यादा सांसदों ने संसद में भी प्रस्तुत किया है। गांधी भवन, लखनऊ में आयोजित एक दिवसीय विचार गोष्ठी में श्री भरत गांधी के नेतृत्व में लोकतंत्र सेनानियों ने भरत गांधी के साथ मिलकर राजनीति सुधारो अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का फैसला किया। श्री भरत गांधी लोकतंत्र सेनानियों को राजनीति सुधार के सूत्रों पर व्याख्यान देने लखनऊ आये थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जाने-माने संविधान विशेषज्ञ व लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष कश्यप ने की, उद्घाटन संबोधन में लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के राष्ट्रीय महासचिव चतुर्भुज त्रिपाठी ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के आंदोलन को दबाने के लिये 1 जुलाई, 2017 के शाननादेश से जिलाधिकारियों को किसी के ऊपर भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, रासुका लगाकर जेल भेजने का अधिकार दे दिया है। ये खबर मीडिया से गायब है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान हालात आपातकाल से भी बुरे हैं। उन्होंने हॉल में आत्महत्या कर गये अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कलिखो पुल के 62 पृष्ठों के आत्महत्या नोट के तथ्यों से लोगों को परिचित कराते हुये कहा कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह सड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि देश को इस हालत से भरत गांधी जैसा वैचारिक क्रांतिदूत ही बचा सकता है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि मै श्री भरत गांधी के राजनीतिक व आर्थिक विचारों से बहुत प्रभावित हूॅं और हमने फैसला किया है कि हम लोकतंत्र सेनानी उनके साथ कमर कसकर एक बार फिर उसी तरह खड़े होगे जैसे जयप्रकाश जी के साथ हम प्रथम आपातकाल के खिलाफ लड़े थे।       
गांधी भवन, लखनऊ में भरत गांधी फाउण्डेशन एवं लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के संयुक्त तत्वाधान में एकदिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था-‘राजनीति सुधारों आन्दोलन में लोकतंत्र सेनानियों की भूमिका’। इस गोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन करते हुये जाने-माने संविधान विशेषज्ञ व लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष कश्यप ने कहा कि चुनाव सुधार के बिना इस देश में किसी सुधार की कल्पना नही की जा सकती। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून बनाया जाना आवश्यक है जिससे किसी भी चुनाव में आधे से ज्यादा वोट पाना अनिवार्य हो जाय।   
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात राजनीतिक विचारक श्री भरत गांधी ने लोकतंत्र सेनानियों को राजनीति सुधार के 25 सूत्रों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के नाम पर पश्चिमी सोंच से और संस्कृतिप्रेम के नाम पर इतिहासग्रस्तता से हमें उबरना पड़ेगा। श्री गांधी ने कहा कि कि नेताओं,  अधिकारियों, व्यापारियों व मीडिया को गाली देना तब तक व्यर्थ है, जब तक वैकल्पिक राजव्यवस्था व अर्थव्यवस्था का कोई मॉडल सामने न हो। उन्होंने कहा कि आज की व्यवस्था कूबड़ वाले ऊंट जैसी है। इस ऊंट पर जो भी बैठेगा, उसे कमर हिलाना ही पड़ेगा और जो लोग कभी ऊंट पर नहीं बैठे हैं, उनसे गालियां सुनना ही पड़ेगा, क्योंकि वे कमर हिलने की असली वजह नहीं जानते। 
गोष्ठी में बोलते हुए श्री गांधी ने कहा, ‘देश में आपातकाल लगा, तो लोकतंत्र सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर मुकाबला किया। उन्होंने अपना परिवार खोया, अपनी जवानी खोयी, काम-धन्धा खोया, खेती-बाड़ी खोयी, अपना स्वास्थ्य खोया और कईयों को तो अपनी जान गंवानी पड़ी। उस समय मीडिया ने कुछ ऐसा माहौल बना दिया था कि इंदिरा को सत्ता से हटाया जायेगा, तो एक नये राष्ट्र का निर्माण होगा, जिसमें गरीबी, बेरोजगारी, विषमता, भ्रष्टाचार, अपराध, गुण्डागर्दी, सांस्कृतिक पतन आदि कुछ नहीं होगा। लेकिन यह सपना बहुत जल्द उसी तरह चकनाचूर हो गया, जैसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का आजाद भारत का चकनाचूर हुआ था। इंदिरा गांधी को हटाने वाली जनता पार्टी तहस-नहस हो गयी। कांग्रेस दोबारा से आ गयी। इसके बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ 1987 में वी.पी.सिंह जी आये। लेकिन हालात जस के तस रहे। उन्होंने सपना दिखाया कि पिछड़े और दलित सत्ता संभाल लें व ओ.बी.सी को आरक्षण मिल जाये, तो सब ठीक हो जायेगा। पिछड़े और दलितों को सत्ता मिली भी। लेकिन कुछ हुआ नहीं। मुट्ठी भर लोगों को अमीरी मिल गयी, बाकी लोग जहां के तहां रह गये। उसके बाद नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की जोड़ी यह कहकर आयी कि दूसरे देश के लोगों को अपने देश में धंधा-बिजनेस करने की छूट दे देंगे, तो देश में चारों तरफ पैसा ही पैसा हो जायेगा, मगर ऐसा नहीं हुआ। बाजपेयी जी स्वदेशी के सपने के साथ आये। लेकिन 24 : विदेशी निवेश का कानून बनाकर देश के मीडिया को ही विदेशों को गिरवी रखकर चले गये। अन्ना हजारे और उनकी टीम के लोग भ्रष्टाचार रोकने आये थे, लेकिन उनकी टीम भ्रष्टाचार में लिप्त हो गयी। हिन्दू राज का सपना दिखाकर मोदीजी आये। लेकिन हिन्दूवाद और राष्ट्रवाद के नाम पर देशी-विदेशी खरबपति पूरे देश को अजगर की तरह निगल रहे हैं। भाजपा के पुराने सिद्धांत और पुराने नेता, दोनों को दफन कर दिया है। लोगों में भारी असंतोष है। लेकिन लोगों के असंतोष के सुर में मीडिया सुर मिलाने को तैयार नहीं है। एक बार फिर आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गयी है। इस बार आपातकाल मीडिया पर नहीं लगा है, खरबपतियों ने मीडिया के सहारे आम जनता पर लगाया है। 
भारत की राजव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने के लिए श्री भरत गांधी 2002 से राजनीति सुधार के कार्यक्रम चला रहे हैं। भारत की संसद के लगभग 400 सांसदों को वे राजनीतिक सुधारों के बारे में व्याख्यान दे चुके हैं,  उन्हें समझा चुके हैं और 137 सांसद उनके सुधारों पर संसद में कानून बनाने के लिए प्रस्ताव भी पेश कर चुके हैं। नागरिकों और देशों की राजनीतिक और आर्थिक आजादी के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संधि का मसौदा तैयार किया है व दुनिया के 198 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष स्वीकार करने हेतु रखा है। अविवाहित रहकर एक त्यागी-तपस्वी का जीवन जीने वाले श्री भरत गांधी व्यवस्था परिवर्तन करने के लिए ‘राजनीति सुधारो अभियान’ चला रहे है, तथा देश भर में राजनीति सुधारकों को प्रशिक्षित करने के लिए व्याख्यान देते हैं। संसद में सैकड़ो सांसदों के समर्थन के बाद भी जब उनके प्रस्ताव पर सामाजिक सुरक्षा के लिये कानून नहीं बना तो उनके समर्थकों ने सन् 2012 में एक नई राजनीतिक पार्टी बना लिया, जिसके श्री भरत गांधी नीति निर्देशक हैं। यह पार्टी कन्नौज अपहरण काण्ड में कानूनी कार्यवाही करने के कारण आजकल चर्चा में है।
गोष्ठी में लोकतंत्र सेनानी संगठन के श्री गिरीश सक्सेना, पी. के. त्रिपाठी, माता प्रसाद तिवारी, सोवरन सिंह कुशवाहा, राम स्वरूप लोधी, राम शंकर गुप्ता आदि सेनानियों ने और वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के प्रदेश अध्यक्ष हुकूम सिंह, सादेश अली मशीह व सुरेन्द्र प्रधान भी अपने विचार रखें।
भवदीय
(पी. के . त्रिपाठी)
लोकतंत्र सेनानी 

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