विनाश काले विपरीत बुद्धि वाले ही हमेशा, विरोधी बनकर, निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल( निषाद पार्टी) को नुकसान पहुंचाने में लग जाते हैं

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो , 1 अगस्त 2017।   विनाश के समय बुद्धि पलट जाती है अथवा बुद्धि पलटने के कारण विनाश होता है –
ये तो बहस का विषय हो सकता है किन्तु उपर्युक्त सूक्ति मुझे भाग्यवादी अधिक प्रतीत होती है | यदि हम इसकी व्याख्या करें तो इसका अर्थ ये निकलता है कि जब इंसान का विनाश निकट आता है तो उसकी बुद्धि उसका साथ छोड़ देती है अर्थात् विनाश तो पहले से ही सुनिश्चित होता है बस उसे बुद्धि से सहयोग प्राप्त हो जाता है और उसका विनाश आसानी से संपन्न हो जाता है | व्यक्तिगत तौर पर मैं कर्म की महत्ता में विश्वास रखता हूँ; अतः मैं ये मानता हूँ कि बुद्धि के अक्रिय हो जाने के कारण ही ऐसी स्थिति आती है | जब लोग अपने हितैषियों की बात मानना बंद कर दें, अधिक चिडचिडे हो जाएँ , अपनी सोच को सर्वोपरि मानने लगें , अपने निकट सम्बन्धियों को चोट पहुँचाने लगें तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि कुछ गड़बड़ है और इस पर कहीं तो विराम लगना चाहिए नहीं तो बहुत देर हो जायेगी |
इंसान बहुत बार नकारात्मक सोच का शिकार हो जाता है और उसे पूरी कायनात उसके विरोध में षड़यंत्र करती हुई नज़र आती है – यदि कोई कार्य विफल हो जाता है तो उसके कारणों को खोजने के बजाये वो भाग्य को दोषी ठहराने लगता है और ऐसे में कोई उसे सही सलाह देने का प्रयास भी करंता है तो उपर्युक्त उल्लेखित लक्षण प्रदर्शित करने लगता है और अपने हितैषियों से दूर होता जाता है और पुनः विफलताओं का ग्रास बनता जाता है – ये एक प्रकार का दुष्चक्र बन जाता है जो कि विनाश के समीप ले जाने में उसकी मदद करता है और इसी पूरी प्रक्रिया को तुलसीदास ने कितनी सुन्दरता से एक पंक्ति में समझा दिया है- विनाशकाले विपरीत बुद्धि |
कई वर्षों से संगठन और पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं ने बहुत संघर्ष किया और बहुत कष्ट के दिन भी देखा है। सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को कोई शिकायत नहीं है पार्टी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष से...
दिन प्रतिदिन संगठन के बारे में, कुछ लोगो ने पार्टी के रजिस्ट्रेशन के बारे में, चुनाव चिन्ह को लेकर, प्रत्यासियो के सीट बंटवारे को लेकर काफी बिरोध झेलने पड़े... परिणाम यह रहा कि आज जो राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संजय कुमार निषाद जी के नेतृत्व ने कर दिखाया वो आपके सामने है कि -
विश्व पटल पर आपका एक मज़बूत बिधायक आपके साथ है और
ये समाज जो टिकट की बिख मांगता था 2017 विधानसभा में टिकट बाट रहा था ...
दुर्भाग्य कहे या evm का घोटाला जो हमे ही नही माया और मुलायम को मिट्टी में मिला दिया... 
अगर डॉ साहब जीते होते या कुछ और सीट निकली होती तो शायद कितने लोग डॉ साहब के पुस्तैनी रिश्तेदार बताने लगते.. और हारने पर खूब महबूब में कमी नजर आ रही है...
साथियो...  2014 में कई लोगो ने संगठन व राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऊपर तरह तरह के इल्जाम लगाए थे..
आज वो सब साथ है।
जिन्हें नेतृत्व पर भरोसा है वो पारदर्शिता नही देखते..
जो पार्टी व राष्ट्रीय अध्यक्ष पर संशय करे वो पक्का किसी पार्टी का दलाल है
हमेशा पॉजिटिव स्तर से सोचना लाभदायक होता है
साथियों
       एक सवाल ......
क्या सपा,बसपा,कांग्रेस,भाजपा,रालोद व अन्य जितनी भी राजनैतिक पार्टिया है वह अपनी रणनीति फेसबुक, व्हाटसैप, न्यूज़ मीडिया, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रसारित करती है कि कार्यालय पर तय होती है। उनकी रणनीति गोपनीय होती है तो वह सफल है। दूसरी तरफ निषादो की जितनी भी पार्टिया जन्मीं उनके लोगो ने पार्टी की नीतियों को रोड पर बहस कर सभी पार्टियों को रोड पर ला दिए।
     "निषाद पार्टी" और माननीय डॉ संजय निषाद जी की रणनीतियों से पार्टी इस मुकाम तक पहुची है की आज सभी पार्टीया निषाद पार्टी से भयभीत है। लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि वही लोग जो पूर्व में निषादो की पार्टियों को दीमक की तरह खा गए, आज वही लोग निषाद पार्टी में भी जो पदाधिकारी तन, मन, धन से समर्पित है, उनको बहकाने की कोशिश में हैं और पार्टी को बुरा भला कह रहे है।
निषाद पार्टी ने उन सभी निषाद बंधुओ को एक पहचान दी, जिससे उनको लोग देश प्रदेश में लोग जानने समझने लगे, ये महामना डॉ साहब की देन है।
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद व NISHAD पार्टी के संगठनात्मक  कैडर कैम्प में हमेशा ऐनक (नजरिया) और नंबर(दृष्टि) बदलता है फर्क जो कैडर के कैम्पस में नियमित आता हो, समाज में जाकर काम करता हो।
कोई भी कार्यकर्ता जब तक संगठन के उद्देश्य पूर्ति के लिए काम करे तब तक वह अनुशासित कार्यकर्ता है,
नहीं तो मिट्टी में से आया था फिर मिट्टी में मिल जाये। पक्का पात्र बनने के लिए तपना पड़ता है, कच्चे पात्र में अमृत भी डालो अपनें साथ अमृत को भी मिट्टी में मिला देगा।
संगठन का उद्देश्य- सत्ता व व्यवस्था में परिवर्तन एक मात्र लक्ष्य
विचारधारा- हम मूलवासी महाराज गुह्यराज निषाद बंशज के है। सवर्णवादी व्यवस्था छोड़ो। मूलवासी को जोड़े।
सिद्धांत- सामाजिक- जागृति, चिन्तन, दोस्त- दुश्मन की पहचान कर अपने वंश को जोड़ना।
कार्यक्रम- सत्ता हासिल करने हेतु विशाल जागरूकता एवं जागृति कार्यक्रम, विशाल रैली, आन्दोलन, धरना-प्रदर्शन, कैडर कैम्प, मिटींग आदि
जो अच्छे अनुशासित कार्यकर्ता है वह काम कर रहे हैं।
निजी स्वार्थ वाले  लोग पेट व परिवार पालन-पोषण व समाज को गुमराह कर पार्टी पर टीका-टिप्पणी में लगें है।
ऐसे लोगों को महाराज गुह्यराज निषाद सदबुध्दी दे। जिसको जिवन में कुछ करने की तमन्ना हो आगामी कैडर कैम्प में जरूर आये।
दुश्मन पार्टियों का निषाद विरोधी चेहरा, आरक्षण वादाखिलाफी, संवैधानिक हनन जो हो रहा है उससे लोगों का ध्यान मोड़ने का कार्यक्रम में कुछ गुमराह लोगों को निषाद पार्टी के पिछे पड़े रहने के लिए लगाया हैं। जो निषादो को गुमराह करनें का काम है।
समाज गाँव में रहता हैं गुमराह करने वाले पहले गाँव में जाये तब कीसी  पर टीका-टिप्पणी करें।