क्या यही है आजादी असली मायने?

सुल्तानपुर, एकलव्य मानव संदेश के लिये डॉ दीपक कुमार निषाद द्वारा लिखा गया लघु लेख, 15 अगस्त 2017। क्या यही है आजादी असली मायने? 
      आज गरीब, निर्बल, शोषित, पिछड़ा, दलित, आदिवासी, मूलनिवासी आदि शब्दों से जो लोग नवाजे जाते है, आज भी अपने हक़ एवं अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे है। आज भी इनकी आजादी उन्ही लोगो के पास गिरवी रखी हुई है और वो लोग इनसे वंदे मातरम, भारत माता की जय, जी श्रीराम, पाकिस्तान मुर्दाबाद हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारो की अपेछा रखते है। क्या जी श्रीराम बोलने से रामराज्य आ जायेगा? क्या भारत माता की जय बोलने से सभी हमारी माताओ के कष्ट दूर हो जाएंगे? क्या पाकिस्तान मुर्दाबाद कहने से हिंदुस्तान जिंदा हो जाएगा?
   नही आजादी का असली मायने यह नही होता है। आजादी हमे इसलिए मिली थी कि हम इस देश में हो रहे अत्याचारों से मुक्ति मिले? लेकिन आज का दौर ऐसा चल रहा कि गांव में दलित,पिछड़ा सुरक्षित नही,रोड पे माँ बहने सुरक्षित नही, अस्पतालों में बच्चें सुरक्षित नही, क्या इसी आजादी के लिए हमारे पुरखों ने अपनी जान गवाँई थी। हमारे पुरखों ने अपने आने वाली पीढ़ी के लिए जाने गवाँई थी पर देखने को यह मिलता है कि आज का दौर बद से बदतर हो गया है। आज हम लोग दर दर की ठोकरे खा रहे रहे हैं, रोज़ी रोटी के लिए मोहताज़ है। क्या हम इसी लायक है?