अलीगढ़ में आज जामा मस्जिद से नमाज के बाद निकलते युवकों द्वारा नारे वाजी पर बबाल, स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर, 11 अगस्त 2017। आज अलीगढ़ में ऊपरकोट कोतवाली के बाहर, सामने जामा मस्जिद से नमाज पड़कर निकल रहे युवकों में से कुछ उपद्रवियों द्वारा नारेवाजी और जुलूस निकालने की कोशिश को पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा रोके जाने पर पत्थरबाजी सुरू हो गयी और पथराव में दरोगा राजकुमार घायल हो गया। दरोगा के सिर पर पत्थर लगने से चोट लगी है। एक युवक के भी घायल होने की भी सूचना मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण कर लिया है और भारी मात्रा में पुलिस, पीएसी और रेपिड एक्शन फोर्स मौके पर तैनात की गई है।
फ़ायरिंग का प्रमाण कारतूस भी सड़क पर पड़े खाली खोकों के रूप में प्राप्त हुआ है। लगभग 10 मिनट तक फायरिंग हुई, पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए रबड़ की गोलियां दागीं। इस बबाल में मीडिया कर्मी भी बाल बाल बच्चे। 
जिलाधिकारी का कहना है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। अलीगढ़ में कोई कर्फ्यू नहीं है। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित में है। उच्चाधिकारी स्थिति पर नज़र लगाए हुए हैं। 
आज का यह बबाल सोमवार को रेलवे रोड पर एक कचौड़ी बिक्रेता द्वारा आपसी झगड़े में लाइसेंसी रिवॉल्वर से चलाई गोली से 2 सगे भाई, मुस्लिम युवकों की मौत पर युवकों में व्याप्त रोष का परिणाम बताया जा रहा है। 
साथ ही आगामी नगर निगम चुनाव भी इस लड़ाई को आग में घी का काम कर रहे हैं। क्योंकि की अलीगढ़ के पुराने भाजपाई, बीजेपी में विभिन्न पार्टियों के दागियों को पार्टी में शामिल होने से नाराज बताये जा रहे हैं। अनेकों पदाधिकारियों का दबी जुबान से कहना है कि मोदी जी साफ राजनीति की बात और साफ सफाई की बात करते थे, लेकिन आज बीजेपी को कूड़ा घर बनाने पर तुले हुए हैं। अब जब भ्रस्ट नेताओं को पार्टी में शामिल किया जा रहा है तो ईमानदार कार्यकर्ता जनता को क्या जबाब दें। इसके अलावा अधिकांश व्यापारी वर्ग जीएसटी से खुश नहीं है। और पार्टी की लगाम उनको कुछ भी कहने से रोक रही है।
अब जनता बड़ते बेरोजगरी और गिरती जनता, व्यापारी और किसान की आमदनी से चिंतित है, इसीलिए बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए उपद्रव और अन्य कार्यक्रम जारी रखने में ही अपनी भलाई समझ रही है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अपराध और भ्रस्टाचार रोकने में असफल सवित हो रही है। और पार्टी की नीतियों से कुछ को लाभ और अधिकांश को परेशानी ही हो रही है।  लेकिन प्रशासन की सूझबूझ से ही जनता को दंगों से बचाया जा सकता है।