नहीं सुधर रहे निषाद ?

जौनपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर प्रदीप निषाद की रेपोर्ट, 28 अगस्त 2017  दिन रात निषादों को कार्यक्रम के माध्यम से जागृत किया जा रहा है, फिर भी एक वाक्या हमारे सामने आया..
यह तश्वीर एक निषाद घर तेरही की है, जिसमे जिनकी माता का देहान्त हुआ है वे आर्यो का चरण धोकर माथे चढ़ा रहे हैं। इसके बाद वस्त्र व मुद्राए भेंट किए भोजन उपरान्त अपने हाथो से पान खिलाया। हमें बड़ा विचित्र लगा। यह कुरितियाँ प्रथाए आज भी घर की हुई है जो कि हमारे निषाद साम्राज्य को स्थापित करने मे बाधक है जागो।
दरवाजे पर निषाद राज अपने हाथो से लिखा है, वाह रे निषाद।



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