काल्पनिक शक्ति का एहसान मानते हैं, जिसने मानव के विकास में बाधा डाली है, जिसने मानवता को टुकड़ों में बांटा है

मेरठ, एकलव्य मानव संदेश के लिए इंजी. पी.पी. श्रीवर द्वारा भेजा गया लेख। कुछ दिन पहले एक धार्मिक प्राणी, हमारे पास रात गुज़ारने आया, वह थोड़ा बीमार था..
लेकिन धार्मिक स्कूल में पढ़ा था, तो दिमाग़ी तौर पे बहुत बीमार था।
मैं रात को दूसरे लड़कों को जीव विज्ञान के बारे में कुछ बता रहा था,
धार्मिक प्राणी बोला, "ये सब झूठ है, साइंस की बातों के पीछे लगकर ज़िंदगी बर्बाद मत करो, साइंस-वाइंस कुछ नहीं होती "
मैंने उसकी दवा उठाकर अपनी जेब में डाली,  उसका मोबाइल ऑफ़ करके अपनी जेब में डाला और रूम की लाइट और पंखा बंद कर दिया।
धार्मिक प्राणी बोला, "ये क्या कर रहे हैं ?"
मैंने कहा, "ये दवाई, मोबाइल, पंखा, बल्ब ये सब साइंस के आविष्कार हैं, अब अंधेरे में बैठकर मच्छर मार और बोल कि साइंस कुछ नहीं होती "।
धार्मिक प्राणी खिसयानी हंसी हंसने लगा।
मैंने लाइट ऑन की और उससे कहा, "साइंस से जुड़ी हर चीज़ का सिर्फ़ दस दिन त्याग करके दिखा दे, उसके बाद बोलना कि साइंस कुछ नहीं होती "
वह प्राणी बिना कुछ बोले चुपचाप सो गया।
ऐसे धार्मिक प्राणियों की कमी नहीं है, जो साइंस की हर चीज़ इस्तेमाल करते हैं और साइंस के विरुद्ध भी बोलते हैं।
साइंस के जिन अविष्कारों ने हमारे जीवन और दुनिया को बेहतर बनाया है, वे सब अविष्कार उन्होंने किये, जिन्होंने धार्मिक कर्मकांडों में समय बर्बाद नहीं किया।
आज कोई भी धार्मिक प्राणी साइंस से संबंधित चीज़ों के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता, लेकिन ये एहसान फ़रामोश साइंसदानों का एहसान नहीं मानते। ये उस काल्पनिक शक्ति का एहसान मानते हैं, जिसने मानव के विकास में बाधा डाली है। जिसने मानवता को टुकड़ों में बांटा है।
साइंसदान, अक्सर नास्तिक होते हैं, लेकिन जाहिल प्राणी कहेंगें," साइंसदानों को अक्ल तो हमारे God ने ही दी है"
लेकिन ऐसे मूर्ख इतना नहीं सोचते कि उनके God ने सारी अक्ल नास्तिकों को क्यों दे दी, धार्मिक प्राणियों को मन्दबुद्धि क्यों बनाया ?
पिछले 150 साल में, जिन अविष्कारों ने दुनिया बदल दी, वे ज़्यादातर नास्तिकों ने किये या उन आस्तिकों ने किये जो पूजा-पाठ, इबादत नहीं करते थे.
अंधविश्वास और कट्टरता से भरे धर्म वालों ने ऐसा कोई अविष्कार नहीं किया, जिससे दुनिया का कुछ भला होता.
इन्होंने अलग किस्म के आविष्कार किये,
ऊपरवाला ख़ुश कैसे होता है ? 
ऊपरवाला नाराज़ क्यों होता है ?
स्वर्ग में कैसे जायें ?
नरक से कैसे बचें ?
स्वर्ग में क्या-क्या मिलेगा ?
नरक में क्या-क्या सज़ा है ?
हलाल क्या है, हराम क्या है ?
बुरे ग्रहों को कैसे टालें ?
मुरादें कैसे पूरी होती है ?
पाप कैसे धुलते हैं ?
ऊपरवाला किस्मत लिखता है,
वो सब देखता है,
वो हमारे पाप-पुण्य का हिसाब लिखता है,
जीवन-मरण उसके हाथ में है,
उसकी मर्ज़ी बगैर पत्ता नहीं हिलता,
ऊपरवाला खाने को देता है,
वो तारीफ़ का भूखा है,
वो पैसे लेकर काम करता है,
पित्तरों की तृप्त कैसे करें ?
मंत्रों द्वारा संकट निवारण,
हज़ारों किस्म के शुभ-अशुभ,
हज़ारों किस्म के शगुन-अपशगुन,
धागे-ताबीज़,
भूत-प्रेत,
पुनर्जन्म,
टोने-टोटके,
राहु-केतु,
शनि ग्रह,
ज्योतिष,
वास्तु-शास्त्र,
पंचक,
मोक्ष,
हस्तरेखा,
मस्तक रेखा,
मुठकरणी,
वशीकरण,
जन्मकुंडली,
काला जादू,
तंत्र-मन्त्र-यंत्र,
झाड़फूंक,
वगैरह......  वगैरह........
इस किस्म के इनके हज़ारों अविष्कार हैं..
इन्सान को उसके विकसित दिमाग़ ने ही इन्सान बनाया है, नहीं तो वह चिंपैंजी की नस्ल का एक जीव ही है,
जो इन्सान अपना दिमाग़ प्रयोग नहीं करते, वे इन्सान जैसे दिखने वाले जीव होते हैं, वे इन्सान नहीं होते।
अपने दिमाग़ का बेहतर इस्तेमाल कीजिये,
अंदर जो अंधविश्वासों का कचरा भरा है, उसको जला दीजिये, अंधेरा मिट जायेगा, आपके अंदर रौशनी हो जायेगी।