बाढ़ से बिहार में भारी तबाही, बाढ़ से बचाव कार्यों में भ्रस्टाचार की वजह, जानमाल का भारी नुकसान

पटना, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर, 17 अगस्त 2017। बिहार में अब नदियां उगल लाशें उगल रहीं हैं। उफनी नदियों का जलस्तर कहीं-कहीं कम होने के बाद कई जगह पानी में डूब चुके लोगों की लाशें अब बाहर आ रही हैं।
नेपाल व उत्तर बिहार के सभी जिलों में हो रही भारी वर्षा के कारण गंडक, बूढ़ी गंडक, मसान, पंडई, दोहरम, गांगुली, सिकटा, ओरिया, द्वारदह, हड़बोड़ा, मसान, बलोर आैर हरपतबेनी नदियों ने अपने क्षेत्रों में  जमकर तबाही मचाई है। पिछले 24 घंटों में 16 और लोगों की मौत हो गई। इससे मौत का आंकड़ा बढ़कर 72 हो गया है। कई जगह पानी में डूब चुके लोगों की लाशें अब बाहर आ रही हैं। तीन दिनों में 52 लोग और डूब गए। पिछले तीन दिनों में सीतामढ़ी और बेतिया में कुल 52 लोग डूब चुके हैं। पश्चिम चंपारण में बाढ़ का कहर जारी है। बेतिया में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, सीतामढ़ी में कुल 32 लोग डूब चुके हैं। पूर्वी चंपारण में बाढ़ की वजह से 15 ब्लॉक में भारी नुकसान हुआ है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को एनडीआरएफ और सेना के हवाले कर दिया गया है। मोतिहारी शहर में भी बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। वहीं सुगौली स्टेशन पर बाढ़ का पानी पहुंच गया है। मोतिहारी में अब तक मरने वालों की संख्या 12 हो गई है। सेना की 7 टुकड़ियां और एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 27 टीमें बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने में लगी है। पिछले 24 घंटे में 24 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। इस बीच बाढ़ के पानी के बीच मुश्किल जीवन बहुत ही मुश्किल हो गया है। बिहार के बाढ़ वाले इलाकों में प्रभावितों की जिंदगी काफी मुश्किल हो गई है। कुछ इलाकों में महिलाएं इसे दैवीय प्रकोप मानते हुए पूजा कर रही हैं तो कहीं सहायता  कैम्प्स में ही लोग राहत के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। लेकिन बिहार में
सहायता कार्यो में जमकर हुए भ्रस्टाचार ने ही बाढ़ के प्रकोप को और बढ़ाया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नल और कुएं पानी में डूब गए हैं, वहां पीने के पानी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई जगहों पर लोग ऊंचाई वाले इलाकों में सड़कों पर रात गुजार रहे हैं। लोग पानी से बचकर ऊंचाई वाले इलाकों में आ तो गए हैं, लेकिन रातभर सांप-बिच्छू का डर लगा रहता है।