राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के द्वारा निषाद वंशीय आरक्षण के लिए किये जा रहे कार्य बहुत ही सराहनीय हैं

सीतापुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर, 5 सितंबर 2017। मझवार की पर्यायवाची जातियों केवट, मल्लाह, माझी, मुजाबिर, राजगोंड, गोंड मझवार   को उनके मूलजाति "मझवार" के नाम से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र सरकार द्वारा निर्गत करने हेतु एवं मझवार की पर्यायवाची जातियो से सम्बंधित पूर्व सरकार द्वारा दिनांक 21/12/2016 को निर्गत  शासनादेश एवं 17 अतिपिछड़ी जातियो को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए ज़ारी दिनांक 31/12/2016 का शासनादेश( जो कि डा0 भीम राव आंबेडकर ग्रंथालय एवं जन कल्याण समिति, गोरखपुर  द्वारा जनहित याचिका(PIL) सं0 2129/2017 के माध्यम से माननीय उच्च न्यायलय इलाहाबाद में  चुनौती दिया गया है) 11 सितम्बर 2017 को  उ0 प्र0 सरकार द्वारा माननीय उच्च इलाहाबाद में चुनैती दिए गए शासनादेशों के पक्ष में सरकार द्वारा काउंटर एफिडेविट दाखिल करने एवं प्रभावी करने हेतु राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद (RNEP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद के नेतृत्व में  उ. प्र. के लगभग समस्त जनपदों में उनके पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सैकडों-हजारों की संख्या में दिनांक 04/09/2017 से अनवरत धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और सम्बंधित  अधिकारियो को ज्ञापन दे रहे हैं।  डा0 संजय निषाद  अध्यक्ष RNEP ने  माननीय उच्च न्यायालय  इलाहाबाद में 11 सितम्बर 2017 को प्रभावी पैरवी करने हेतु संवैधानिक मामलो के जानकार एक वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत अग्रवाल को खड़ा किया है। जो एक सराहनीय कार्य है और ऐसे ही प्रभावी कार्य की समाज को जरूरत है। मैं राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के समाजोत्थान के ईस पुनीत कार्य की सराहना करता हूँ।
इंजी. अशोक कुमार सहानी
सीतापुर।