अन्धविश्वास की भी हद होती है

ग़ाज़ीपुर, एकलव्य मानव संदेश के द्वारा डॉ. जी. सिंह कश्यप का संदेश। अन्धविश्वास की भी हद होती है ।
गीता मे लिखा गया है, आत्मा ना पानी में डूब सकती है, ना हवा से उड़ सकती है और ना ही अग्नि में जल सकती है।
मतलब आत्मा पर किसी चीज़ का प्रभाव नहीं होता।
आत्मा अमर है जिस तरह इंसान कपड़े बदलता है।
उसी तरह आत्मा शरीर बदलती है।
चलो मान लिया, लेकिन जब किसी पापी को नरक में सजा के तौर पर यातनाएँ दी जाती हैं, वह कैसे दी जाती  हैं ? क्योंकि शरीर तो पॄथ्वी पर जला दिया जाता है और आत्मा पर किसी चीज़ का असर होता नही। तो फिर लोगों को स्वर्ग का लालच और नर्क का भय क्यों दिखाया जाता है ??
पाखंड बंद करो और मूर्ख बनाना भी।
जागते रहो.... जगाते रहो.....
सजग रहो.... सजग रहो......

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