मकान का वायदा करने वाली सरकार की लचर पैरवी से मकान टूटने का ऑर्डर दिया हाई कोर्ट ने

वृन्दावन(मथुरा), एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 18 सितम्बर 2017। मथुरा जनपद के वृन्दावन में यमुना के किनारे कम आय वर्ग लोगों ने घर और कुछ छोटे-छोटे संतो ने अपने आश्रम जमीन की खरीद फरोख्त के बाद बना लिए हैं। इसमें से कुछ गाओं की जमीन मथुरा विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आती है और कुछ की नहीं। लेकिन 1976 के बाद से आज तक विकास प्राधिकरण के किसी भी अधिकारी और कर्मचारियों ने इनके निर्माण को रोकने की कभी कोई कोशिश नहीं की।
वृन्दावन के इस जमुना किनारे के ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभा द्वारा और अन्य एजेंसियों द्वारा विकास कार्य भी समय समय पर कराये जाते रहे हैं। कुछ गलियों में सड़कों और नालियों का निर्माण हुआ है तो प्रत्येक गली में बिजली पहुंच गई है। लेकिन सरकारी लापरवाही के वज़ह से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस आबादी को अवैध घोषित करके मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण को मकान ध्वस्तीकरण के आदेश दिये हैं।
अब जब कुछ मकान तोड़े जाने लगे और कुछ को नोटिस भी जारी किया गया है, कुछ को नहीं। इलाके में रहने वाले लोगों की एकता को तोड़ने के लिए एक चाल सावित हो रही है।
आज देस की राजधानी दिल्ली हो या आर्थिक राजधानी मुंबई हो या कोलकाता या चेन्नई हो हर जगह अवैध कालोनियों बसी हुई है और अभी भी बस रही हैं, केवल एक सिर छुपाने की आस में। इन बड़े बड़े शहरों में जब सरकारों ने खुद अवैध कालोनियों को वैध किया है, तो वृन्दावन में यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश की योगी सरकार क्यों नहीं अपना रही है। क्या इस लिए तो नहीं कि यहाँ की अधिकांश जमीन निषादों की थी और काफी संख्या में निषादों ने भी अपने मकान बनाये हुए हैं।
अब जब इस धार्मिक नगरी के लोगों ने यहाँ से विधायक और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और सांसद हेमा मालिनी से मिलकर गुहार लगाने की कोशिश की है तो मंत्री जी इन पीड़ितों से मिलने से भी कतरा रहे हैं और सांसद हेमा मालिनी अमेरिका के दौरे पर हैं। अब जब इन पीड़ितों ने जिलाधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया, तो पीड़ितों को सरकार ने डराने के लिए, उनपर ही उल्टा मुकद्दमा जिलाप्रशासन द्वारा कराया गया है।
लापरवाही सरकारी अधिकारियों और सरकार की, खामियाजा भुगत रहे हैं, अपने पैसे से जमीन खरीद कर मकान बनाने वाले। क्या यह एक सही कदम है, अगर नहीं तो 1976 से अब तक जितने भी अधिकारी और कर्मचारी मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण में तैनात रहे और अवैध कॉलोनियों को बसते देखते रहे, उन सब पर भी मुकदमा दायर किया जाना चाहिए। जिन अधिकारियों ने इन बस्तियों में विकास कार्य कराये उनपर भी फ़ास्ट ट्रैक अदालत बनाकर मुकद्दमा चलाया जाना चाहिए। और उनसे जुर्माना बसूलकर इन टूटने वाले मकानों के मलिकों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। और अगर ऐसा नहीं हो सकता है, तो सरकार को हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इन कॉलोनियों को वैध घोषित करने के लिए अपने सरकारी वकील को आदेश देना चाहिए।
जो सरकार पीड़ित लोगों की समस्या को नहीं सुनती है या उनका समाधान नहीं कर सकती है, उसका विरोध अगर पीड़ितों द्वारा किया जाता है तो वह गलत भी नहीं है।