माझी को मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार से नहीं मिल रहा है कोई भी सहारा

ग्वालियर हाईकोर्ट ने हमारी समाज के एक मजबूत हाथ, भाई जयकिशन जी माझी, रन्नौद, जिला शिवपुरी, जो मंडी चुनाव जीत कर वर्तमान में मंडी अध्यक्ष हैं का चुनाव माझी जाति का होने के कारण निरस्त कर दिया है। यह सुनकर मन को आघात सा लगा कि प्रदेश में करीब 50 लाख की संख्या का माझी समाज होते हुए भी हमारे लोग एक एक कर माझी समाज विरोधी सरकारी नीतियों की आये दिन बलि चड़ते जा रहे हैं।
फिर भी विडंबना देखिये कि इन सरकारी हादसो में सबसे ज्यादा शिकार जो तबका (नौकरी पेशा) हो रहा है, वह अपने बचाव मे रंचमात्र भी हाथ पैर न चला कर अपने आपको जैसे किसी अदृश्य शक्तियो के सहारे छोड़ कर कुछ चंद चंदाखोरो के हाथो की कठपुतलियां बन इसे सामाजिक आन्दोलन बनाने के बजाय अदालतो मे न्याय ढूंढ रहा है। जहां न्याय इसलिए मिलना संभव नहीं है, क्योंकि माझी हमारी जाति है, यह हम कहते हैं, किन्तु यह सरकार हमें कहार, भोई, धीमर, केवट आदि मान कर माझी मानने से इंकार करती है। और बस अदालतें इसी सरकारी नीति को आधार मानकर हमें न्याय नही दे पा रही हैं। अतः सरकारें जब तक हमें 29 नम्बर के साथ नही जोड़ेंगी तबतक अदालतों के दरो पर जाना महज अपने धन और उर्जा को नष्ट करना है।
अतएव लड़ाई हमें अदालतो में लड़ने के बजाय सरकारों से लड़ना चाहिए, क्योंकि अदालतों में हमने हमारे एक विद्वान माझी महामना तक को धराशायी होते देखा है। और जिन कुछ मामलो में अदालतों से थोड़ी बहुत जो राहतें (स्टे) मिली थी, वह पूर्व सरकारों के समय हमारे द्वारा निकलवाऐ गए सरकारी आदेशों पर मिलती रहीं। किन्तु ऐसे सभी आदेश वर्तमान सरकार और सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों की घोर लापरवाही के कारण इन्हीं अदालतो ने रद्द कर दिए।
खैर कोई बात नही वैसे हमारी इस हक की लड़ाई को सरकार से लड़ने का हमारे पास एक पर्याप्त यह आधार भी है कि प्रदेश के अनेकों सम्मानित विधायक गणो ने 4 मार्च 2016 को हमारे पक्ष मे इस आशय का एक संकल्प विधानसभा मे पारित भी करा दिया है कि कहार भोई धीमर केवट आदि को माझी जाति के साथ 29 नम्बर पर जोड़ दिया जाए।
किन्तु यह हमारी अति निंदनीय कमजोरी है कि इस संकल्प को जस का तस लागू कराने के लिए 50 लाख होकर भी हम सरकार पर अभी तक प्रभावी रूप से दबाव नहीं बना पाए। इसमें दोषी हमारे नौकरी पेशा लोग ज्यादा हैं, जो अपनी उर्जा और धन इस पर न खर्च कर अदालतों पर खर्च कर रहे हैं।
  तो फिर आईये यह दबाव कैसा बनाया जा  सके इस पर विचार करें।
समाज के हर संघर्ष मे समाज के साथ  आपका अपना               
अशोक कुमार बाथम, शिवपुरी, मध्यप्रदेश।

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