जहाँ देखो वहाँ बेइमानों का चेहरा

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर द्वारा इंजी. सरवन निषाद(प्रदेश प्रभारी, निषाद पार्टी) का संदेश, 27 सितम्बर 2017। भाजपा राज के तात्कालिक समय मे हर तरफ लूट खशोट मची हुई है। भाजपा खुद जनता को बड़े पैमाने पर लुट रही है। चारो तरफ से जनता में हाहाकर पैदा हो गया है, लोग त्रस्त होकर अपने आप को व दुसरों को जिम्मेदार ठहरा कर एक दुसरे को कोस रहे हैं। वही भाजपा अपना घर भरने में पीछे नहीं हट रही, दिन प्रतिदिन लूट मचाये जा रही है। आये दिन महँगाई बढ़ती जा रही है आखिर क्यों ? कोई कारण जरूर होगा, जो ये सरकार भी जानती है कि महंगाई से भाजपा सरकार में तेजी से गिरावट हो रही है फिर भी महंगाई चरम सीमा पर दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । सवाल तो दिमाग में खड़े हैं। और साफ है किन्तु सोचने वाली बात है क्यों ?
पेट्रोल के दाम, सीमा के चरम नाम।
गैस के दाम, महात्मा गांधी के नाम।
प्लेटफार्म का दाम, 7 गुना के नाम।
ट्रेन के किराये का दाम, जल्द ही मचाने वाले है कोहराम।
इत्यादि...
ऐसे तमाम दामों की आवाज को बढ़ा कर जनता को बेहाल बना कर लुटा जा रहा है। भाजपा अपना एंकाउट भर रही है, आखिर क्यों ? क्या वजह है ?
कही ऐसा तो नहीं..
समाज निर्बल है, शोषित है, लाचार है, गरीब है। उसे आज के जमाने में पैसे से मतलब है। भाजपा जनता का ही पैसा लुट कर कहीं जनता को ही तो देने वाली नही है। उन्हीं को बेवकुफ बना कर उन्ही का पैसा उन्हीं को।
काला धन भाजपा के अकाउंट में तो नहीं है ?
पेट्रोल, रेल किराया, गैस, प्लेटफार्म के बढोत्री दाम भाजपा के अकाउंट में तो नही जा रहे है ?
आखिर कोरे कागज पर राजनीति क्यों हो रही है ।
भाजपा को बचाने के लिए भाजपा का एक लास्ट हथियार
मोदी जी चिल्लायेगे...
क्या आप के अकाउंट मे पैसा आया ?
भोली जनता का जवाब .... हाँ
सावधान ।
संगठन में - कायदा नहीं,
                 व्यवस्था होती है ।
संगठन में - सूचना नहीं,
                 समझ होती है ।
संगठन में - कानून नहीं,
               अनुशासन होता है।
संगठन में - भय नहीं,
                 भरोसा होता है ।
संगठन में - शोषण नहीं,
                 पोषण होता है ।
संगठन में - आग्रह नहीं,
                 आदर होता है ।
संगठन में - सम्पर्क नहीं,
                  सम्बंध होता है ।
संगठन में - अर्पण नहीं,
                  समर्पण होता है ।
इसलिये स्वयं को संगठन से जोड़े रखें।
जय निषाद राज