फूलन देवी के हत्यारे और मुख्यमंत्री योगी की गाड़ी को रोकते और काले झंडे दिखाते निषाद पार्टी के कार्यकर्ता

इलाहाबाद, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर, 6 सितंबर 2017। निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने अधिकारों को मांगते हुए, जिसको योगी आदित्यनाथ ने 2015 में कहा था कि निषादों को आरक्षण मिलना चाहिए। निषाद आरक्षण के पूरे हक़दार हैं। 21-12-2016 का शासनादेश कहता है कि केवट मल्लाह को मझवार का आरक्षण मिलना चाहिए। तुरैहा का प्रमाण पत्र निर्गत होना चाहिए। प्रमाण पत्र जारी होने चाहिए, इसके लिए हम लोग ज्ञापन देते रहें हैं, लेकिन अभी तक प्रमाणपत्र कुछ ही लोगों के जारी हो रहै हैं। पैसे की मांग की जा रही है। पैसे वालों के बन रहै हैं और गरीबों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल(निषाद पार्टी) के कर्मठ कार्यकर्ता करो मरो का नारा देते हुए लगातार चार दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। 29 मार्च 2017 को, जिसको बसपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट ने स्टे ले लिया था, को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इनका प्रमाण पत्र बनना चाहिए। केवट मल्लाह मझवार जाति का प्रमाण पत्र के हकदार हैं। जो प्रमाणपत्र बनेंगे वह हमारे अधीन होंगे।
हाईकोर्ट के फैसले और शासन आदेश के बावजूद भी केवट मल्लाह का प्रमाण पत्र पिछड़ी देखकर लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है। जो संविधान और कानून का उल्लंघन है। जिसको लेकर आज 3 दिन से लगातार धरना जारी चल रहा है। 
निषाद समाज की वीरांगना, जिसने अपने अन्याय के खिलाफ खुद लड़ाई लड़ी उसका हत्यारा आज बाहर घूम रहा है और मुख्यमंत्री उसको अपने मंच पर लेकर घूम रहे हैं। इसका मतलब मुख्यमंत्री जी खुद चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में कई फूलन देवी पैदा हों और ढेर सारे लोग हथियार उठाने के लिए मजबूर हों। जिसका मान सम्मान पर चोट पहुचती हो, मान घटता हो, वह कुछ भी करने के लिए तैयार होता है। जिसका जीता जागता उदाहरण आपके सामने आज निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने योगी की गाड़ी के सामने जाकर, काला झंडा दिखाकर, अपने गुस्से का इजहार किया। अपने मां-बाप को रखा और कुछ कार्यकर्ताओं ने पीछे से सड़े टमाटर और अनुभव की बरसात की। अब योगी को अपनी बातों पर कायम रहना चाहिए। जो वादा किया था इन्होंने उसको पूरा करें। हाई कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कराएं, और सभी जिला अधिकारियों को निर्देश जारी करें कि केवट, मल्लाह, तुरैहा का प्रमाण पत्र जारी करें। इसका अखबार में प्रचार प्रसार कराएं, जिससे अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र देने का जो शासनादेश है उसका पालन हो सके। पिछड़ी जाती से जो लोग निकाल दिए गए हैं उनको लाभ मिल सके।