लोकसभा उप चुनाव में निषाद पार्टी ला सकती है तूफानी गदर की आहट

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश के लिए शिव सहानी का लेख राहुल कश्यप द्वारा साभर प्रकाशन के लिए, 18 सितंबर 2017। लोकसभा के उपचुनाव में गोरखपुर की सदर सीट पर N.I.S.H.A.D. पार्टी का गदर और तूफान की आहट सुनाई देने लगी है।  पुरानी कहावत है, चाय की प्याली और होठों के बीच कभी भी तूफान आ सकता है। जमुना निषाद जी के मरने के बाद निषादों की राजनीति को सहेजने वाले जिस चेहरे की कमी यह समाज महसूस कर रहा था, वह भी लगभग पूरी हो रही है। निषाद कश्यप समाज N.I.S.H.A.D पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना मा. डा. संजय कुमार निषाद जी को अपना मसीहा और नेता मानने लगा है।
             पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो इस सीट से 5 लाख, 39 हजार,127 वोट आदित्यनाथ योगी को मिले थे। यदि कुल वोट प्रतिशत की बात करें तो 51.80 प्रतिशत वोट मिले थे। जबकि इस सीट से सपा और बसपा दोनों ने निषाद नेताओं को अपनी– अपनी पार्टी से टिकट दिया था। दूसरे स्थान पर सपा रही। सपा उम्मीदवार राजमाती निषाद को 2 लाख 26 हजार 344 वोट मिले थे। जबकि बसपा के निषाद उम्मीदवार रामभूआल निषाद को 1 लाख 76 हजार 412 वोट मिले थे। कांग्रेस के उम्मीदवार अष्टभूजा प्रसाद त्रिपाठी को 45 हजार 719 वोट मिले थे। यदि हम महागठबंधन मान कर इन मतों का योग कर दें, तो इसका कुल योग 4 लाख, 48 हजार, 475 हो रहा है । यदि हम विजयी उम्मीदवार योगी आदित्यनाथ को मिले मतों से इसका अंतर निकालें तो वह करीब 90 हजार, 652 बैठता है ।
         अब हम इस बात पर विचार कर लेते हैं कि महा गठबंधन की ओर से किसे उम्मीदवार बनाया जाए, तो महा गठबंधन जीत की ओर अग्रसर हो सकता है। जब मैं गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र में घूम रहा था और लोगों की चर्चाए सुन रहा था। तो मुझे ऐसा लगा कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अगर किसी जाति विशेष ने प्रगति की है, तो वह निषाद हैं। निषाद जाति ब्राह्मणों को मात देती नजर आ रही है। ब्राहमण खुद वोट नहीं करता, लेकिन जिस पार्टी का समर्थन करता है, उसे दस वोट दिलाने की काबिलियत रखता है ।
      लेकिन गोरखपुर के निषादों के बीच में घूमते हुए मैंने पाया कि निषाद सिर्फ अपने अलावा अन्य दस लोगों का वोट दिलाने की काबिलयत ही नहीं रखता, बल्कि वह अपना खुद का वोट भी देता है। यदि उसकी जाति का प्रत्याशी चुनाव में खड़ा होता है, तो वह अपनी इच्छा से प्रचार भी करता है और अपना पैसा भी खर्च करता है। जब उसकी इस प्रवृत्ति के बारे में मैंने तहक़ीक़ात की तो पता चला कि वह अपने जाति के किसी भी व्यक्ति को उच्च से उच्च पद पर देखना चाहता है। लोगों ने अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (N.I.S.H.A.D पार्टी) का उदाहरण भी मेरे सामने पेश किया । N.I.S.H.A.D पार्टी का इस लोकसभा उपचुनाव सीट पर 75% अपना दबदबा कायम है और ये पार्टी  लोकसभा सदर सीट को जीत सकती है।

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