आज मेरे पिताजी को इस दुनिया से जाए 5 साल पूरे हो गए

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश संपादक/प्रकाशक जसवन्त सिंह निषाद की कलम से, 21 अक्टूबर 2017। एक बहुत ही भावुक दिन है आज का मेरी जिंदगी में। आज भाई दूज के दिन सुबह 5.20 बजे मेरे पिताजी श्री नत्थी लाल जी ने हम सभी को छोड़ कर ईश्वरीय दुनिया में अपना स्थायी स्थान बनाया था। पिताजी को लिवर का केंसर हो गया था और लगभग 10 माह के इलाज के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया था।
मेरे पिताजी ने बड़ी ही परेशानियों को झेलते हुए हम 7 बहन और भाइयों को पाला पोसा और मुझे बड़ी शिक्षा के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी तक पहुँचाया था। एक गजब की शिक्षा मुझे मेरे पिता जी से मिली कि परिस्थितियों से न घबराना। हमेशा ऊंची सोच के साथ कमजोरों के लिये रोजगार उपलब्ध कराना।
क्योंकि मेरे पिताजी के पिताजी उनको 7 साल की अल्प आयु में घर पर पड़ी एक बड़ी डकैती में 1950 में मारे गए थे इसलिए उन्होंने खुद परेशानियों को करीब से देखा था।
पिताजी के दो ताऊ जी थे लेकिन किसी ने जमीन में हिस्सा नहीं दिया था। और मेरे बाबा की सरकारी नौकरी कम उम्र होने के कारण मिली नहीं थी। इसलिए जो जीवन मेरे पिता ने जिया वो शायद ही हम अंदाजा लगा सकते हैं।
पिताजी हमेशा जन सेवा को प्राथमिकता देते थे।
इतना ही बहुत है। आगे कभी फिर लिखूंगा।
मेरे पिताजी की आत्मा जहाँ भी रहे शांति से रहे। इसी प्रारर्थना के साथ।
अपका साथी
जसवन्त सिंह निषाद