मेरा समाज भूख से मर रहा है और तू आधार पूंछ रहा है-डॉ संजय कुमार निषाद

गोरखपुर, एकलव्य मानव सन्देश रिपोर्टर, 17 अक्टूबर 2017। मानवता शर्मसार हो गयी,
           सरकारें योजना बनाती रह गईं।
          गरीब और गरीब हो      गया,
          मानवता शर्मसार हो गयी।
         ये देख कर एक मां कह रही है,
         मेरा लाल तड़प तड़प मर गया।
         भात भात मांगते मांगते गोद में,
       शर्मसार हो गयी मानवता।
       वहा रे समाज, वाह रे सरकार,
        क्या यही है आईना भारत का।
        बेसरम कुर्सी के लिए लडते रहे हमारे रहनुमा
        जनता को दिखाते रह गये अपना नकली चेहरा।
आज झारखंड में जो बच्ची भूख से मरी है, उसकी मां कह रही है कि  बेटी ने गोद में भात-भात मांगते प्राण त्याग दिये।
क्या यही है मोदी का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ फॉर्मूला ? जो सरकार अपने नागरिकों की रक्षा न कर सके, ऐसी सरकारों को सिर्फ़ इस्तीफा नहीं चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिये। पर इन्हें कोई फर्क नहीं पडेगा।
तेरा आधार तो एक बहाना है, असल में तो गरीबों और गरीब बनाकर मारने का तेरा ये असली निसाना है। आधार कार्ड नहीं बना है अगर गरीब का तो उसका क्या दोष है।
सरकार को तुरंत ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ 302 का मुकद्दमा लिखाकर जल्दी से जल्दी सजा देने की कार्यवाही करनी चाहिए और आगे से कोई गरीब भूखा न सोए इसके लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। यह कहना है निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल( निषाद पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना डॉ संजय कुमार निषाद जी का।

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