सावधान, सावधान, सावधान-डॉ संजय कुमार निषाद

सूरत(गुजरात), एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर राम विजय बिन्द की रिपोर्ट, 7 अक्टूबर 2017। जिस मेहनत से स्वर्णो के बच्चे IAS, CA, SSC, MCA की तैयारी करते है....
क्षत्रियों बच्चे UPSC, RAILWAY, NDA आदि की परीक्षाओ की तैयारी करते है.....
बनियों के बच्चे MBA, Business, engineering, IIT, Medical etc. की तैयारी करते है.....
उससे भी कडी मेहनत से हमारे पिछड़ा और शोषित वर्ग के बच्चे ...
*कांवर यात्रा, 
दहीहंडी,
गणेश पूजा,
नवरात्रि,
पैदल - लेटकर धार्मिक
यात्रा,
परिक्रमा , जिस देवी देवता का ट्रेंड चलता है जैसे कि पीताम्बरा माता,
सांई बाबा,
कैला देवी करौली आदि के दर्शन की तैयारी करते रहते है.......*
इन मानसिक गुलाम, सामाजिक, वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से पिछड़ों को सद्बुद्धि प्रदान करें....
@ईश्वर केवल शोषण का नाम है
*सुकरात*
@ईश्वर का जन्म ही गहरी साजिश से हुआ है।
*कार्ल मार्क्स*
@इस देश मे जो नौजवान इश्वरवादी है मेरे नजर मे नामर्द है!
*शहीद भगत सिंह*
@इस ब्रह्माण्ड मे कोई ईश्वर नही है_ 
*तथागत गौतम बुद्ध*
@पुरे विश्व मे अगर कोई यह साबित कर दे कि ईश्वर है तो मै अपना सर्वस्त्र उसे दे दूँगा_ *स्टीफन हाँकिन्स*      
HB
@कोइ ऐसा इश्वर नहीं है जो इस ब्रह्माण्ड को संचालित कर रहा है तुम अपने कर्म  के जिम्मेदार स्वंय हो_
*रजनीश ओशो*
जिस दिन ये मंदिर जाने वाली भीड़ स्कूल की तरफ जाने लगेगी वो देश खुद ही विकसीत होना शुरू कर देगा।
* बाबा साहब अम्बेडकर*

सच्चाई को समझें 
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अधिक से अधिक लोगों तक ये संदेश पहुंचाएं

भारत में ग़रीबी बहुत व्यापक है जहाँ अन्दाज़े के मुताबिक़ दुनिया की सारी ग़रीब आबादी का तीसरा हिस्सा रहता है। 2010 में विश्व बैंक ने सूचना दी कि भारत के 32.7% लोग रोज़ना की US$ 1.25 की अंतर्राष्ट्रीय ग़रीबी रेखा के नीचे रहते हैं और 68.7% लोग रोज़ना की US$ 2 से कम में गुज़ारा करते हैं।

भारत में ग़रीबों की संख्या पर विभिन्न अनुमान हैं। आधिकारिक आंकड़ों की मानें, तो भारत की 37 प्रतिशत आबादी ग़रीबी रेखा के नीचे है। जबकि एक दूसरे अनुमान के मुताबिक़ ये आंकड़ा 77 प्रतिशत हो सकता है।
भारत में महंगाई दर में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
कई विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे में मासिक कमाई पर ग़रीबी रेखा के आंकड़ें तय करना जायज़ नहीं है।
विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में सामने आया था कि ग़रीबी से लड़ने के लिए भारत सरकार के प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया था कि भ्रष्टाचार और प्रभावहीन प्रबंधन की वजह से ग़रीबों के लिए बनी सरकारी योजनाएं सफल नहीं हो पाई हैं।
डॉ संजय कुमार निषाद
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद
एवं
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल
(N.I.S.H.A.D. पार्टी)

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