सरकारी पैसे से नाटक नहीं जानता की सेवा की जाती है योगी जी

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश एडिटोरियल, 19 अक्टूबर 2017। कल अयोध्या में दीपावली के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपनी सरकार के मंत्रियों और महामहिम राज्यपाल की उपस्थिति में राम लीला का एक नाटक मंचन किया सरकारी पैसे से। सरकार जनता के पैसे से चलती है। तरह तरह के टैक्स लगती है जनता की जेब से पैसे निकालने के लिए। सरकारी पैसे से जनकल्याण की योजनाओं का संचालन किया जाता है। जनता के दुःख दर्द को कम करने के लिए योजनाओं पर पैसा खर्च किया जाता है।
अभी ज्यादा समय नहीं गुजरा है जब उत्तरी उत्तर प्रदेश में भयंकर बाढ़ के प्रकोप से करोड़ों लोगों को परेशानी से गुजरना पड़ा और अभी भी परेशान हैं। इस बाढ़ से मुख्यमंत्री का ग्रह जिला भी भयंकर प्रभावित हुआ था।
ये बाढ़ लगभग हर साल आती है। योगी जी लगातार 20 साल से ज्यादा समय से लोक सभा सांसद रहे हैं। इनकी पार्टी की केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी और अब मोदी जी की सरकार है। इन दोनों सरकारोँ ने बाढ़ से बचाने के लिए कितना प्रभावशाली कार्य अब तक किया है और उसका जनता को कितना लाभ मिला है ? अगर मिला है तो बाढ़ से तबाही क्यों नहीं रुकी।
अभी कुछ दिन पहले गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में सैकड़ों बच्चों ने ऑक्सीजन की कमी  और जानलेवा जापानी बुखार से दम तोड़ दिया, खुद मुख्यमंत्री की समीक्षा के दूसरे दिन ही। और ये सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है, आज भी बच्चे मर रहे हैं इलाज के अभाव में खुद मुख्यमंत्री के गृहजनपद में।
कितने वास्तविक गरीब परिवार को रसोई गैस पहुँची ? क्योंकी आज भी गरीब के पास 600 से 700 रुपये नहीं हैं एक साथ गैस के सिलेंडर को खरीदने के लिए।
कितने वास्तविक गरीबों के बच्चे कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षा पा रहे हैं ? शायद ज़ीरो।
कितने बेरोजगरों को रोजगार दिया इस सरकार ने या आज मशीनीकरण से रोजगार छीन लिया गया है ? सरकार की गलत नीतियों से।
क्या शिक्षा मित्रों के घर खुशियां लौटी ? टेट के पेपर ने अच्छे अच्छों की हवा खराब करदी है ऐसी सूचना है।
नोट वंदी और ऊंची और परेशान करने वाली जीएसटी से आज रोजगार बड़े हैं या रोजगार छीने हैं सरकार ने।
क्या माँ बहानों की सरेआम इज़्ज़त लूटना बंद हो गया आपके एंटीरोमियो अभ्यान से ?
क्या बालू खनन माफियाओं से मुक्ति दिलाकर, राम को पार लगाने और भगवान बनाकर पहली बार पूजा करने वाले समाज को, जिसने देस को आज़ाद कराने में अपनी जान और रोजी रोटी को भी खत्म कर दिया था उनको आपने उनकी बालू खनन का अधिकार दिया या और छीन लिया है ?
योगी जी आप और आपकी पार्टी केवल नाटक करने में ही अपना समय खर्च कर रही है। किसान के कर्ज का 20 पैसा माफ करने का प्रमाण पत्र वांट रहै हैं, लेकिन वास्तविक गरीब और मजदूर को आपके बैंक आज भी 20000 का लोन नहीं दे रहे हैं, वल्कि उनके खातों के रुपयों को मिनिमम वैल्वन्स के नाम पर काट कर 250 करोड़ से ज्यादा एक एक बैंक कमा रहे हैं।
क्या आज भ्रष्टाचार बंद हो गया ?
क्या उत्तर प्रदेश की सभी सड़के गड्डा मुक्त हो गईं ?
क्या इलाहाबाद कोर्ट के 29 मार्च के आदेश के वावजूद 17 अति पिछड़ी जातियों के अनूसूचित जाती के प्रमाण पत्र बनने लगे हैं?
वास्तव में तो जो समस्या गिनाई गई हैं उनसे भी ज्यादा और भी समस्याएं हैं लेकिन ये जुमलेवाज़ और नाटकवाज़ सरकार स्थानीय निकायों के चुनाव में लाभ लेने के लिए एक बार फिर सरकारी रामलीला का नाटक कर रही है, इससे सावधान रहने की जरूरत है। अगर नाटक को ही वास्तविक मानोगे तो अमीर और गरीबों की खाई बड़ती जाएगी और कोई राम आपकी मदद करने नहीं आएगा।
आज इस पार्टी ने उन सभी महा भृस्टाचारियों को अपनी पार्टी में मिला लिया है, जो पहले सपा, बसपा, कांग्रेस में भ्रस्टाचार करके आकूत संपत्ति खड़ी कर चुके हैं और वो आज भ्रस्टाचारी नहीं, विभीषण के रूप में इस बीजेपी पार्टी को मजबूत करने में लगे हैं, अपनी मजबूती को बनाये रखने के साथ।
जब कोई सरकार नाटक को दिखा कर जनता का ध्यान वांटे तो मान लेना आपके बुरे दिन आने वाले हैं। क्योकि सरकारी पैसा नाटक के लिए नहीं जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए खर्च किया जाता है

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