कब तक लुटते रहोगे ?

अलीगढ़, एकलव्य मानव सन्देश रिपोर्टर, 13 अक्टूबर 2017। जब देश के लोग ही नासमझ हैं तो कोई भी लूटेगा ही। अमित शाह, गडकरी, जेटली, सुषमा या जे.पी. नड्डा जैसे तमाम मोहन भागवत के चेले, कोई कबड्डी खेलने तो राजनीति कर नहीं रहे। वो तो लूटेंगे ही, क्योंकि आप लोग वोट तो हिन्दू मुसलमान के मुद्दे पर देते हो। कही आवाज़ ही नही उठाते की नोटेबन्दी का महाघोटाला करके देश क्यों लूटा। और न ही आप पूछते हो कि कालाधन का अंबार कहाँ गया। क्यों नहीं आये15 लाख आपके खाते में ?
अपने कभी नहीं पूछा कि आपको लिखित में नीच कुजात अछूत क्यों बना रखा है?
आप तो केवल यह सुनते हो कि अगर आरएसएस/बीजेपी को वोट नहीं दिया तो आतंकबादी आपको मार डालेंगे, मुसलमान खा जाएंगे, मंदिर को तोड़कर मस्जिद बना लेंगे या लव जिहाद करेंगे। डरके मारे आपकी  पैंट गीली हो जाती है और फूल पर वोट देकर फूल(Fool) बन जाते हो। फिर चाहे कोई भी लूटे, आपको तो लुटाना है।
यह तो बताओ, दंगा कराता कौन है?
हिन्दू मुसलमान के दिमाग में दुश्मनी का जहर घोलता कौन है?
जब दंगा होता है तो कोई आरएसएस का नेता मरता है क्या ?
केवल हिन्दू हिन्दू करके लिखित में नीच, कुजात, अछूत बनाये गए लोगों को मरबाते हैं और पतली गली से वोट लेकर निकल जाते हैं। इसबार तो बीजेपी ने नोटेबन्दी का महाघोटाला करके बेचारे देसवासी को खत्म ही कर दिया।
अमित शाह के बेटे को 16000 गुना मुनाफा होता है और बेचारा देसवासी भूख से तड़प रहा है।
फिर भी हम हैं कि जानबूझकर वेवकूफ़ बने हुए हैं।
कब तक लुटते रहोगे ?
पूजाराम निषाद
(रिटायर्ड इंस्पेक्टर, सेंट्रल कस्टम & एक्साइज, आगरा)