नशा नाश की जड़ है

सीतापुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर, 29 अक्टूबर 2017। नशा नाश की जड़ है भाई , इसका दुख अतिशय दुखदाई होता है। इसलिए नशा को हर हालत में छोड़ देना चाहिए। नशा सामाजिक बुराईयों की जननी है, जिससे अनेक सामाजिक अपराध पैदा होते हैं। फलस्वरूप नशा समाज को बीमार बनाकर सामाजिक वातावरण को भी प्रदूषित कर देता है। यह बात मूलवासी सेना के आवाह्न पर विधान सभा महमूदाबाद के शमसाबाद गॉव में 'नशामुक्त गोष्ठी' को सम्बोधित करते हुए सामाजिक चिंतक देवेन्द्र कश्यप ने कही। उन्होंने आगे कहा कि मूलवासी सेना का मुख्य मक़सद शोषित, पीड़ित, निर्बल, वंचित समाज का विकास करना है। लेकिन विकास रूपी निर्दिष्ट लक्ष्य की प्राप्ति में नशा जैसी बुराई बाधा बन रही है। इसलिए नशा को समूल नाश किया जाने का प्रयास भी किया जा रहा है। नशे के चंगुल में फंसने वाले का कैरियर चौपट हो जाता है। किसी भी देश का विकास वहां के निवासियों के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है तथा नशेड़ी व्यक्ति का स्वास्थ्य सन्तुलित नहीं होता है। यदि किसी देश में नशा नामक दीमक लग जाय तो वह देश अन्दर ही अन्दर से टूट जाता है।
इसलिए नशा भगाओ - देश बचाओ जैसी सामाजिक मुहिम चलाने की जरूरत है। मूलवासी सेना सरकारों से यह मांग करती है कि प्रदेश-देश की बेहतरी के लिए नशाबन्दी कानून अतिशीघ्र लागू करें। नशा समाज को खोखला कर देता है जिससे समाज की तरक्की थम जाती है। हिंसा, बलात्कार, चोरी, आत्महत्या जैसी सामाजिक व्याधियों की वजह भी नशापान है। अत: नशापान न करने का सभी लोग संकल्प लें।
शिवपाल धुरिया ने कहा कि अशिक्षा की वजह से लोग नशा जैसी बुरी लत में फंसे हैं। इसलिए समाज को स्वस्थ बनाने के लिए अशिक्षा को समाज से खत्म करना होगा अर्थात समाज को ज्ञानवान, समझदार व जानकार बनाना होगा। नशा एक सामाजिक बुराई ही नहीं अपितु अभिशाप भी है, इसके त्यागे बिना समाज की तरक्की मुमकिन नहीं है। नशा का ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं। जिससे बेरोजगारी की रफ्तार बढ़ रही है। इससे युवा बुराईयों के जाल में फंसता जा रहा है जो देश के भावी कर्णाधार हैं। कैसे आगे बढ़ेगा अपना देश यह चिंता बौद्धिक वर्ग को सता रही है। नशा से परिवार उजड़ जाते हैं। आपस में मारपीट की प्रबल सम्भावना बनी रहती है। जिससे सामाजिक बिखराव पैदा होता है। फलस्वरूप समाज का शोषण व उत्पीड़न शुरू हो जाता है।
अन्त में श्रंग्वेरपुर महाराज श्रीनिषादराज जी के समक्ष सभी को नशा त्यागने की शपथ दिलाई गई तथा यह अपील भी की गई कि नशा जैसी बुराई पैदा करने वाले धन्धों से दूर रहें। कार्यक्रम का आयोजन दिब्यांग अंकित कुमार कश्यप व अध्यक्षता सोनेलाल ने किया l
     इस मौके पर शिवनाथ निर्मल, शिवप्रसाद कश्यप, गुड्डू कश्यप, हाशिम, रामजीवन, मेनका कश्यप, कमला देबी सहित अन्य उपस्थित रहे l

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