क्या मोदी का मतलब " मैं धोका दूँगा " सही है ?

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश एडिटोरियल रिपोर्ट, 26 नवम्बर 2017। आज संविधान दिवस पर संविधान निर्माण सभा की ड्राफ्ट समिति के अध्यक्ष बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर  को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, संविधान की रक्षा की खातिर एक पत्रकार के नाते सच आप सभी तक पहुंचाने के लिए कटिबद्ध होते हुए आप सभी से कहना चाहता हूं कि आज देश का संविधान खतरे में है, अतिवादी और झूठे वादे करके सत्ता पर कब्जा करके देश को लूटा जा रहा है। गरीब को और गरीब बनाने के लिए तरह तरह की चलें चाली जा रही हैं। आज गरीबों के बच्चे कुपोषण, भूख, बुखार और बलात्कार के शिकार हो रहे हैं। देश में खतरनाक साम्प्रदायिकता का जहर घोलकर लोगों को उनकी वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए नित नए प्रोपेगेंडा किये जा रहे हैं। कभी गरीब की थाली को 200 रुपये से ज्यादा महंगी दाल करके खाली किया जाता है, तो कभी टमाटर, प्याज 100 रुपया किलो तक पहुँचाकर। आज महंगाई बड़ी है, मेट्रो किराया के गुना बड़ा है, बिजली भी काफी महगी हुई है। बाबा रामदेव के चैले और अमितशाह के बेटे की समापत्ति कई गुनी बड़ी है, लेकिन गरीब की आय कई गुनी घटी है। शिक्षा महंगी होने से हायर एजुकेशन की तरफ बच्चों का ध्यान हटकर मजदूर बनने की ओर ज्यादा हुआ है। क्या भ्रस्टाचार कम हुआ ? क्या यही राष्ट्रवाद है। अब सावधन होने की जरूरत है नहीं तो मोदी का मतलब  " मैं धोका दूँगा " आपको ही ज्यादा सटीक है। और अब आपको सोचना है कि आपको केवल एक वोट से अपने भाग्य को बदलना है या धोखे ही खाना है ?