मछली न देने पर दवंगों ने मत्स्य पालक को गोली मारी, केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के क्षेत्र में एक वर्ष में तीसरी हत्या

फतेहपुर, एकलव्य मानव संदेश के लिये रामबाबू निषाद की रिपोर्ट, 26 नवम्बर 2017। पहले तारनडेरा, फिर पलटू डेरा और अब जाफरगंज में मछली न देने पर, मत्स्य पालक छोटकू निषाद की गोली मारकर हत्या कर दी गई। केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के संसदीय निर्वाचन छेत्र फतेहपुर में जान से मार देने वाली एक वर्ष के अन्दर धडाधड तीन घटनायें अब तक हो चुकी हैं। और मारपीट की सहस्त्रों घटनायें आएदिन होती ही रहती हैं। इस जिले में गरीबों की कोई सुरक्षा नहीं है।
गंगोली निवासी छुटकू निषाद गाओं के बाहर एक तालाब में मछली पालन करता है। गाओं के ही देवनारायण सिंह(ठाकुर) के घर 10 पहले रिस्तेदार आये थे जिनकी खातिरदारी के लिए वह फ्री में मछली लेने गया था, तब छुटकू निषाद ने मछली देने से मना कर दिया था। जिससे देवनारायण चिढ़ गया था। शनिवार शाम को छुटकू अपनी पत्नी के साथ पम्पिंग सेट से सिंचाई कर रहा था। देवनारायण सिंह और उसका बेटा व एक अन्य ने उसे घेर लिया और गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया। और कई राउंड फायरिंग भी की। गोलियों की आवाज़ सुनकर गाओं वाले भी मौके पर पहुंच गए और 100 नम्बर पर पुलिस को सूचना दी। जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, हत्यारे भाग चुके थे।
   इन सबके बावजूद भी केंद्रीय मंत्री महोदया मौन हैं। न कोई कार्यवाही, न कोई पीड्त परिवार के संग संवेदना, न कोई आर्थिक मदद, न उस गाॅव का दौरा।
   क्या ऐसी घटनायें सोची समझी रणनीति या फिर साध्वी निरंजन ज्योति को फतेहपुर से बेदखल करने की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है, या कुछ और।  जिसमें मंत्री महोदया की जाती के निषादों को जानबूझकर कर मारपीट से लेकर हत्यायें तक आसानी से की जा रही हैं।
  इतना सब होने के बाद सपा, बसपा, भाजपा व काँग्रेस में पल रहे गुलाम पालतू तीतर मौन हैं।
   क्या निषादों की जान भेड बकरी से भी सस्ती है। क्योंकि भेड बकरी तो बूचडखानें में काटी जाती है पर निषादों को जानवरों की तरह जब चाहो जहाँ चाहो, गोली मारने के बाद भी कुछ नहीं। क्या यही है रामराज।।
    हमारी भूल कमल का फूल।