पद्मावती और फूलन देवी

कानपुर देहात, एकलव्य मानव संदेश के लिए ज्ञान सिंह निषाद की रिपोर्ट, 15 नवम्बर 2017। भारत के सभ्य समाज के जो लोग रानी पद्मावती के अपमान पर भंसाली को पीट रहे थे, कभी वही समाज थियेटर में फूलन देवी को नग्न देखकर ताली बजा रहा था।
जी हाँ जब शेखर कपूर ने फूलन देवी पर बैंडिट क्वीन (Bandit queen) फिल्म बनायी थी तो उसमें फूलन को कई बार नग्न दिखाया गया था। तब कोई सेना नही आई थी इसका बिरोध करने ? क्या फूलन देवी महिला नहीं थी ? या किसी की बेटी नहीं थीं ?
पद्मावती ने अगर अपनी लाज बचाने के लिए जौहर (जलती आग मे कूद जाना) का साहस दिखाया था तो फूलन ने चण्डी का रूप धारण करके अपने आबरू के लुटेरो को मौत के घाट उतारा था। तब तो इन्ही के जाति में से एक ने जाकर उसी वीरांगना की हत्या कर दी थी।
क्या सवर्ण समाज की नारियो का बस सम्मान ही सम्मान है। अगर अलाउद्दीन खिलजी नीच था तो वे लोग क्या थे ? जिन्होने फूलन देवी को बेआबरू किया था।
भारत का सवर्ण समाज अपने आपको कितना सभ्य संस्कारी एवं नारी का सम्मान करने वाला होने का दिखावा करता है, पर अंदर से कितना खोखला है। इनके लिए मान-मर्यादा इतिहास में दर्ज हर वर्ग की महिला के लिए नहीं बल्कि एक वर्ग विशेष के महिला के लिए है। जबकि पद्मावती ने आबरु बचाने के लिए जान दे दी और फूलनदेवी बलात्कारियों की जान लेकर बलात्कार कि शिकार महिलाओं, लड़कियों को नया जोश हिम्मत और हौसला सिखा गयी, कि किस तरिके से जुर्म का मुंहतोड़ जबाब दिया जा सके।

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