आदिवासी तैराकी प्रतियोगिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया

सोनभद्र, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो चीफ राम विलास निषाद की रिपोर्ट, 13 नवंबर 2017। सोनभद्र के शक्तिनगर के मिश्रा गाँव के रिहंद जलाशय के बगल में बना विशाल तरालताल में रविवार को आदिवासी तैराकी प्रतियोगिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत भूषण तिवारी थानाध्यक्ष शक्तिनगर, विशिष्ट अतिथि के सी जैन, समाजसेवी आरडी सिंह, अजीत सिंह कंग थे। मुख्य अतिथि ने तरणताल पर डीह बाबा का पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रिहंद जलाशय के किनारे बसे आसपास के बहुत से प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम 5 चरणों में सम्पन्न हुआ। अंतिम चरण में 4 प्रतिभागिनो ने विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। तरणताल की लंबाई लगभग 200 मीटर होने के बाद भी प्रतिभागी अपने हूनर के जलवे दिखाते रहे। तरणताल के किनारे दर्शक खिलाड़िओं का उत्त्साहवर्धन तालियां बजाकर करते रहे। 200 मीटर लम्बी दूरी तय करके खिलाड़ी थक भी जाते थे, उसके बावजूद भी हिम्मत और मेहनत से तैराकी के खेल को खेल कर महज 4 प्रतिभागियों ने जीत हासिल किया 1  विजेता प्रदीप कुमार, 2  राजेंदर, 3 भोला साहनी, 4 सूरज कुमार बने। मुख्य अतिथि ने प्रथम विजेता को पुरस्कार देकर सम्मानित किया वही 2, 3, 4, विजेताओं को भी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि भारत भूषण तिवारी ने अपने सम्बोधन में ग्रामीणों और खिलाड़ियो को कहा तैराकी प्रतियोगिता कार्यक्रम का आयोजन सराहनीय है। जलाशय के किनारे निवास करने वाले सभी लोगो को तैराकी के खेल का हूंनर होना चाहिए। तैराकी जानने वाला व्यक्ति प्राकृतिक बाढ़ जैसी आपदाओं से खुद को बचा सकता है और दूसरों को भी बचा कर आत्मरक्षा कर पाने में सफल हो पाता है। ग्रामीणों से सभी लोग तैराकी की जानकारी रक्खे ताकि कभी किसी भी समय बाढ़ और प्राकृतिक जैसी आपदाओं से बच सके। मुझे किसी ने बताया था कि खडिया से बीजपुर लगभग 12 किमी चौड़ी रिहंद जलाशय की नदी को मार्च 1971 में जब नाव जलाशय में जा रही थी नाविक ने मना किया था ज्यादा सवारी ना बैठे उसकी किसी ने बात नही मानी जबरन नाव को उस पार ले जाने का दबाव बनाए जिससे नाव रिहंद जलाशय में जब बीच धारा में पहुँची थी कि भार क्षमता से अधिक यात्री सवार होने से नाव नदी में डूब गई और कई लोग डूब कर मर गए। उसमे से वही बचे जो तैराक थे। इस क्षेत्र की बड़ी घटना थी तब से नाव की सवारी खडिया से बीजपुर बन्द हो गयी है। जब भी नाव में बैठे कभी तो ज्यादा सवारी वाली नाव पर न बैठे सुरक्षा चूक मात्र से घटना घट जाती है। सभी लोगो को आत्मरक्षार्थ हेतु तैराकी को जाने सीखे यह खेल। विशिष्ठ अतिथि ने कहा कि ग्रामीणों में तैराकी की जानकारी होना अति आवश्यक है,तैराकी जानने वाले खिलाड़ियों को सरकार हर  सम्भव मदद कर रहीं है। आज छोटे से कस्बे से कल जिले व  प्रदेश में  तथा देश मे विदेशो में जाकर भी यह खेल खेल कर अपने गाँव, जिले, प्रदेश तथा देश का नाम रोशन कर सकते हैं। इसलिए आयोजन कर्ता जगदीश साहनी से कहेंगे इस क्षेत्र के खिलाड़ियों को जिले और प्रदेश स्तर पर इन खिलाड़ियो की कला को प्रचलित करें। विशिष्ठ अतिथि आर,डी,सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि तैराकी प्रतियोगिता में जो खिलाडी भाग लिए जो विजेता बनने से चूक गए है अगली बार प्रयास करे। तैराकी के खेल में जो भी खिलाड़ी तरणताल में तैर कर अपने हुनर दिखाए है वो सभी साहसी है जो जीत हासिल नही कर पाए उन्हें अगली बार जरूर विजेता बनने का प्रयास करना चाहिए। थानाध्यक्ष ने अभी अपने संबोधन में कहा कि कभी भी जब नाव पर बैठे भीड़ वाली पर न बैठे। सभी ग्रामीण से अपील है कि यह खेल की जानकारी सभी को होना चाहिए, कार्यक्रम की अध्यक्षता जगदीश साहनी अध्यक्ष सोन आदिवासी शिल्पकला ग्रामोद्योग समिति ने की और संचालन प्रवीण पटेल ने किया  कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पी के सिंह चौकी इंचार्ज बीना पुलिस चौकी, रामानुज गौतम, राकेश कुमार निषाद, रामशकल वर्मा, बाबलू गुप्ता, ग्राम प्रधान कोहरौलिया इत्यादि उपस्थित रहे