राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद" व "N.I.S.H.A.D पार्टी" का पहली बार "अनसूचित जाति व मझवार आरक्षण" को लेकर अब-तक किये गये संघर्षो के पल

"राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद" व "N.I.S.H.A.D पार्टी" का पहली बार "अनसूचित जाति व मझवार आरक्षण" को लेकर अब-तक किये गये संघर्षो के पल…!!
पहली बार गरीब शोषित वर्ग ने अपने अधिकार को लेने के लिए राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के बैनर गोरखपुर में 1 फरवरी 2014 से सड़को पर उतरना शुरू किया । जो डीएम कार्यालय पर खत्म होता था । गरीब शोषित समाज का धरना अनवरत 10 फरवरी 2014 तक चलता रहा तब अंततः तत्कालीन डीएम गोरखपुर में सभी तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से अनुसूचित जाति मझवार का प्रमाण पत्र जारी करने को निर्देशित किया। किन्तु सिर्फ गोरखपुर के लिए ही आदेशित होने लगा अन्य जिलों में नहीं ।
17 फरवरी 2014:-
अधिकार लेने का दौर थमा नहीं । एक बार पुनः राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के बैनर तले गरीब शोषित वर्ग ने अपने अधिकारो को लेने के लिए लखनऊ सीएम आवास घेरकर यह जताने की कोशिश की यदि गोरखपुर के केवट मल्लाह माझी आदि को अनुसूचित जाति मझवार का प्रमाण पत्र जारी हो रहा है तो पूरे प्रदेश में जारी होना चाहिए। इससे नाराज होकर सपा सरकार ने लखनऊ में ही हजारों कार्यकर्ताओं के ऊपर लाठियां बरसवाना शुरू कर दिया, तो राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने वहीं बैठ कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया, आश्वासन मिला लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ ।
7 जून 2015:-
गरीब शोषित वर्ग का समर्थन और हौसला राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद को मजबूत करने लगा। संघर्ष के दौर में तब पर भी अधिकार ना मिलने पर संगठन ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए गोरखपुर लखनऊ रेलवे मार्ग मगहर में जाम कर दिया, तो शासन ने क्रुरता का अंजाम देते हुए लाठियों के बाद गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिससे कई लोग घायल हुए, लेकिन एक जांबाज कार्यकर्ता इटावा निवासी वीर अखिलेश सिंह निषाद शहीद हो गया और 37 आंदोलनकारियों को पकड़ कर जेल में डाल दिया गया। 7 महीने कड़ी यातनाएं दी गईं । जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना मा. डॉ संजय कुमार निषाद जी को 1 महीने जेल की हवा खानी पड़ी। इससे गुस्साए कार्यकर्ताओं का जोश दिन दुना रात चौगुना बढ़ने लगा और जब आंदोलनकारियों के साथ महामना की रिहाई हुई तो पूरे प्रदेश में जश्न का माहौल हो गया। ढोल नगाड़े के साथ लोग पटाखे फोड़ कर खुशियां मनाने लग गए।
25 जुलाई 2016:-
इसी बीच गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने वाली एक ऐसी सशक्त महिला जिन्होंने पूरी दुनिया मे एक मिशाल कायम की। दुनिया मे उनके नाम की पढाई होने लगी । लोग उनको पूजना शुरू कर दिये। अत्याचार होना बंद होने लगा। नाम था वीरांगना बहन फूलन देवी (पूर्व सांसद वीरांगना फूलन देवी)। जिनकी संसद के सामने हत्या कर दी गई। उस स्वर्गीय फूलन देवी जी का शहादत दिवस मनाने की योजना की घोषणा होते ही गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में लाखों लोगों के सामने जब 32 फीट के मूर्ति अनावरण की बात आई तो एक बार फिर शासन प्रशासन के हाथ पांव फूल खुल गए और पूर्व सांसद वीरांगना बहन वीरांगना बहन की मूर्ति नहीं लगने दी, तभी पता चला की अधिकार तो पार्टी दिलाती है।
16 अगस्त 2016:-
तब 16 अगस्त 2016 को निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल की गरीबों ने राजनैतिक पार्टी का गठन किया। तब सरकार बनाओ अधिकार पाओ रैली के माध्यम से 15 सितंबर 2016 को लखनऊ के ऐतिहासिक मैदान रमाबाई आंबेडकर मैदान में लाखों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर सभी पार्टियों की नींद हराम कर दिया। जिससे पार्टियों को अपनी जमीन खिसकती नजर आने लगी तो TV पर नहीं चलने दिया। 
2017 विधानसभा चुनाव:-
गरीबों शोषित वर्ग ने अपने अधिकार को लेने के लिए निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल का झंडा बुलंद किया। उस झंड़े को लखनऊ की विधान सभा में पहुँचाने के लिए चुनावी बिगूल बजा दिया। आक्रोश में आकर  2017 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमाया और इस बार फिर राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद और निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की जंतर मंतर का बैरक तोड़ते हुए संसद भवन का घेराव किया। पूरे देश में गरीबो की दहशत का माहौल खड़ा हो गया।  इस आक्रोश को देखते हुए मा हाईकोर्ट ने 29 मार्च को मझवार आरक्षण पर लगी रोक हटा ली और निर्देश जारी किया कि इनको अधिकार मिलना चाहिए। अधिकार से रोकने वाले को दंड किया जाना चाहिए।
9 सितंबर 2017:-
सत्ता के दबाव में फिर एक बार पुनः आनाकानी चालू रही तो एक बार फिर हार ना मानने वाले निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना माननीय डॉक्टर संजय कुमार निषाद जी ने 9 सितम्बर 2017 को फिर रेल रोको आंदोलन करने को तैयार कर ली और इस बार नेतृत्व की कमान प्रदेश प्रभारी इंजीनियर प्रवीण कुमार निषाद के हाथों में रही और सफल आंदोलन के बाद  सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार हो गये। किन्तु अभी 24 घंटे के अंदर बाहर आ गए और प्रमाण पत्र भी बनना शुरू हो गया लेकिन आज भी अधिकारियों की अनदेखी का शिकार हो रहा है गरीब समाज ।
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