मध्यप्रदेश सरकार की आज की कैबनेट बैठक के बाद प्रदेश के करोड़ों मांझियों को निराशा लगी हाथ-हरि माझी

रीवा, मध्यप्रदेश, 12 दिसम्बर 2017, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट। मध्यप्रदेश सरकार की आज की कैबनेट बैठक के बाद प्रदेश के करोड़ों मांझियों को निराशा ही हाथ लगी। क्योंकि सरकार ने 11 नवम्बर 2006 तक जारी किए गए माझी जनजाति के प्रमाण पत्र धारकों, जो सरकारी सेवा में रत हैं  या जो शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं, उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीँ करने का निर्णय लिया है।
एकलव्य मानव संदेश ने जब इस विषय पर मध्यप्रदेश के युवा समाज सेवी और माझी मसले पर न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे याचिका कर्ता, माझी आदिवासी संघ के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट हरि कुमार माझी जी से बात की तो उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने माझी समाज को संवैधानिक अधिकार तो वंचित कर ही दिया था। लेकिन भाजपा सरकार ने भी  सन 2003 से अब तक माझियों के लाखों परिवार बर्बाद कर दिए हैं। हज़ारों लोग बर्खास्त हो चुके हैं। तथा हज़ारों लोग छानबीन कमेटी, कोर्ट कचहरी, शासन प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं।
आज के इस आदेश से माझी कर्मचारी और विद्यार्थी खुश हो जाएंगे और जिनके प्रमाण पत्र मान्य हैं, वो चुनाव नहीं लड़ सकते। तो सरकार को जबरदस्त फायदा होगा।
लेकिन श्री माझी ने बताया कि सरकार को इस वॉर मुह की खानी होगी क्योंकि प्रदेश की  बड़ी आबादी के पास माझी प्रमाण पत्र नही है और जिनका है भी वो 2005 के बाद का है फिर इस आदेश से केवट कहार धीवर निषाद आदि सरनेम धारक वंशानुगत मछुआ नाविक को माझी का प्रमाण पत्र भी नही मिलेगा। इस आदेश से सबसे ज्यादा विन्ध्यप्रदेश का माझी समुदाय नाराज है। क्योंकि सरकार ने माझियों की आवादी छुपाई है। इस निर्णय को जहा एक ओर समाज की गाली खा रहे भाजपाई नेतागण सरकार को समाज का रहनुमा बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस समाज के साथ दगा वता रही है।
जबकी वास्तविकता यह है कि मप्र में निषाद पार्टी की सक्रियता ने भाजपा की नींद खराब कर दी है। वहीं माझी मसले की जनहित याचिका का अभी तक जबाब नही दे पाई सरकार यह सोच रही है कि न्यायालय कुछ राहत दे इससे पहले समाज का विस्वास जीता जाय। पर माझी समाज इस बार भाजपा को नेस्तनाबूद कर देगा ।