निषाद पार्टी की आहट से घबराई मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश एडिटोरियल, 12 दिसम्बर 2017। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार और कांग्रेस की नींद निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) की मध्यप्रदेश में आहट से आज कल उड़ी हुई है। भाजपा सरकार मध्यप्रदेश के आदिवासी समुदाय माझी की पर्यायवाची धींमर, कहार, भोई, केवट, मल्लाह और निषाद जाति के लोगों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने में परेशानी पैदा करती रही है। इन जातियों की यह मांग बहुत पुरानी है और कांग्रेस भी इनको लॉलीपॉप ही देती रही है।
निषाद पार्टी की उत्तर प्रदेश में चल रही हवा का रुख भारत के अन्य राज्यों में होने लगा है। मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश से लगा हुआ है, इसलिए इसका असर यहाँ तेजी से होता है। मध्यप्रदेश में माझी और उसी पर्यायवाची जातियों की जनसंख्या 90 लाख के आसपास है। इस समुदाय का वोट जिस भी पार्टी को मिलता है उसी की सत्ता आ जाती है। इस ताक़त से बीजेपी और कांग्रेस दोनों वाकिफ हैं। लेकिन कोई सर्वमान्य नेता न होने के कारण यह समाज अपनी मांगों और संविधान में प्रदत्त अधिकारों को प्राप्त करने में बहुत ही पीछे रहा है। इन दिनों पार्टियों के कुछ पालतू तीतर जैसे नेता भी नहीं चाहते हैं कि समाज अपने अधिकारों को प्राप्त करे। क्योंकि उनको डर लगता है कि अगर ये समुदाय अनुसूचित जनजाति का लाभ आसानी से लेलेगा तो उनकी खातिरदारी इन पार्टियों में कम हो जाएगी।
पिछले कुछ महीनों से जबसे निषाद पार्टी ने मध्यप्रदेश में अपना कदम बढ़ाया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना डॉ संजय कुमार निषाद की 2 बड़ी सभाएं टीकमगढ़ और रीवा जिले में आयोजित हुईं और 4 सभाएं राष्ट्रीय सचिव व मध्यप्रदेश के प्रभारी जसवंत सिंह निषाद की टीकमगढ़, नरसिंहपुर, शिवपुरी और ग्वालियर के भितरबार में व राष्ट्रीय महासचिव रमेश केवट की सिंगरौली में आयोजित हुईं और उनमें उमड़ा विशाल जनसमुदाय के अलावा अशोक नगर, गुना, जबलपुर भिंड, मुरैना, सागर आदि जिलों में भी जगह जगह कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, जिसने सबसे पहले कांग्रेस को बेचैन किया। क्योंकि की कांग्रेस सरकार विरोधी वोट का लाभ देख रही थी। लेकिन जब से निषाद पार्टी ने कदम बढ़ाए हैं उसके बाद कांग्रेस ने मछुआ प्रकोष्ठ बनाकर इस समुदाय में अपने पालतू तीतर नेताओं को उतार दिया है। लेकिन कांग्रेस और भाजपा की चालों को नाकाम करने में लगी निषाद पार्टी से परेशान भाजपा सरकार अब आज आपनी कैबनेट मीटिंग में इन जातियों को माझी मानकर कुछ राहत देने की कोशिश करने की तैयारी में है।
क्योंकि अभी 2 विधानसभा सभाओं में उपचुनाव होने हैं, और एक उपचुनाव अभी भाजपा हार चुकी है। इसलिये अब अपनी किरकिरी कराने से बचने के लिए एक चारा, जल्द प्रमाणपत्र जारी करके इस माझी आदिवासी समुदाय को मैनेज करने के लिए फेंका जा सकता हैl
निषाद पार्टी मध्यप्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से लड़ना चाहती है और मध्यप्रदेश में सभी पिछड़ी और आदिवासी समुदाय को उनके अधिकारों को देने के लिए इन दोनों पार्टियों से मध्यप्रदेश को बचाना चाहती है। क्योंकि चाहे भाजपा की सरकार बने या कांग्रेस की सरकार,अधिकांश दलबदलू नेता ही सत्ता के करीब और सत्ता में रहते हैं। जुमलेबाज़ी और झूंठे वायदों को करके सत्ता पर कब्जा जमा लेते हैं। और आम पब्लिक को फिर ठगा सा लगता है।