पढा-लिखा होना और जागृत होना दोनो में अंतर है-डॉ संजय कुमार निषाद

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्ट, 23 दिसम्बर 2017। पढा-लिखा होना और जागृत होना दोनो में अंतर है।
किताबों को पढ लेने से, या डिग्रियां हासिल कर लेने से किसी को जागृत नहीं कहा जा सकता है।
हर शिक्षित व्यक्ति जागृत ही हो ऐसा नहीं है।
जागृति का प्रथम सिद्धांत है- अपने दोस्त की पहचान होना।
जागृति का दूसरा सिद्धांत है-अपने दुश्मन की पहचान होना।
जागृति का तीसरा सिद्धांत है- अपनी ताकत और कमजोरी मालूम होना।
जागृति का चौथा सिद्धांत है- दुश्मन की ताकत और कमजोरी मालूम होना।
जागृति का पांचवां सिद्धांत है- अपने महापुरुषों का इतिहास मालूम होना।
यह पांच बातें अगर आपको मालूम हैं और आप अनपढ़ भी हो, फिर भी आप जागृत कहे जा सकते हो।
अगर आप को ये पांच बातें नहीं मालूम हैं और आप शिक्षित भी हो, फिर भी आप जागृत नहीं हो।
आप
डॉक्टर,
वकील
इंजिनियर,
प्रोफेसर,
IPS,
lAS,
हो सकते हो।
मगर आप जागृत नहीं कहे जा सकते।
शिक्षा के साथ साथ सामाजिक जागृति बहुत जरूरी है समाज उत्थान के लिये। हमारे पढे लिखे अधिकारी कर्मचारी पीएचडी धारी, उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति को हमारा सही इतिहास नहीं पता। पता नहीं होना यह बुरी बात नहीं है।
परन्तु जब पता चल जाये कि मेने सब कुछ पढा जो लोगों नें मुझे पढाया, परन्तु मुझे मेरे महापुरुषों का इतिहास नहीं पता।
हमारे महापुरुषों के जीवन संघर्ष और बलिदान, जिसकी वजह से हमें शिक्षा लेने का अधिकार, शिक्षा देने का अधिकार, सम्पत्ति रखने का अधिकार, शस्त्र धारण का अधिकार मिला।
अगर यह जानकारी पता चल जाये।
उसके बाद भी हमारा आदमी सिर्फ खाने पीनें बीवी बच्चों को पालने
घर, गृहस्थी जमाने, सम्पत्ति इकट्ठा करना ही जीवन का उद्देश्य रखता है।
तो तुम्हारा तुम्हारे बच्चों का, तुम्हारे जीवन का, भविष्य सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे समाज का दुश्मन ही तय करेगा।
गुलाम तीन प्रकार के होते हैं-
1.पहला गुलाम वह होता है जो परम्परागत रूप से गुलाम के घर जन्म लेता है।
2.दूसरा गुलाम वह होता है जिसको गुलाम बना लिया जाता है।
3.तीसरा और सबसे खतरनाक गुलाम वह होता है जो मिले अधिकार का सबसे पहले फायदा उठाता है। पढ़ लिख कर नौकरी या कोई बडा पद जैसे आई.ए.एस., आई.पी.एस., विधायक, सांसद और मंत्री बन जाता है और गुलामी ब्राह्मणवाद की करता है। ऐसे गुलाम परफेक्ट गुलाम होते हैं।
धिक्कार ऐसे पढे लिखे परफैक्ट गुलामों पर।
जागो, इतिहास से सीखो और अब नया इतिहास बनाओ।
गुलामी छोड़ो, अब अपनी पार्टी को मजबूत बनाओ।
जय निषाद राज
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल जिंदाबाद
डॉ. संजय कुमार निषाद
राष्ट्रीय अध्यक्ष
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल
(N.I.S.H.A.D. पार्टी)