मछुआरा समाज पूर्व के युगों में पराधीन और पराजित रहा और आज के राजनितिक काल में भी पराधीन और पराजित है।

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्ट, 11 जनवरी 2018। जिस प्रकार चार युग सतयुग त्रेता द्वापर और कलुयग रहा है वैसे ही मछुयारा समाज ने चार काल कांग्रेस सपा बसपा और भाजपा सभी के काल खंडो के देख लिया। सभी युगों और काल कार्य खण्डों का अध्यन भी कर लिया है।
यहां तक सभी चार वर्णनों (ब्राह्मण नेहरू, इंदिरा) क्षत्रिय (विश्वनाथ सिंह) और शुद्र (मोदी, मायावती, मुलायम, लालू नितीश)आदि आदि सहित
परन्तु मछुयारा समाज युगों में पराधीन और पराजित रहा और आज के राजनितिक काल में भी पराधीन और पराजित है।
अगर एक मुश्लिम मुश्किल में होता है तो पकिस्तान तक हिलने लगता है। एक हिन्दू या सवर्ण व् दलित मुश्किल में होता है तो पूरा का पूरा हिन्दुस्तान खतरे में दिखने लगता है। पर एक मछुयारे के बेटी को पूरा गांव व दवंग लोग नंगाकर नोच डालते हैं और जब वह बदला लेती है तो वह अकेले पुरे देश के लिए दश्यु हो जाती। उसके बाद भी मछुआरे यह सोच रहे हैं। की उनके साथ देश है और देश के अन्य लोग और समाज हैं, तो उनके जैसा मुर्ख कोई नहीं है। इसके बहुत से उदाहरण हैं।
जिनको मुर्ख शब्द से आप्पति है वे मद्मवती और दिल्ली की निर्भया काण्ड से फूलन देवी तक के घटनाओ में उभरे समर्थनो व प्रतिकारों का आकलन कर के देख लें।
महेंद्र निषाद की फेस बुक वाल से साभार लिया गया है