निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल और राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद का अनुशासन

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 25 जनवरी 2018। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल और राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद का अनुशासन

राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद एवं निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल का बहुत बड़े पैमाने पर विस्तार हो चुका है। आर.एस.एस  के गुरु गोलवलकर ने एक किताब में लिखा कि " किसी सामने वाले संगठन को तबाह और बर्बाद करना हो तो उस संगठन का नेतृत्व करने वाले लोगों में, महत्वकांक्षा निर्माण कर देना चाहिए।  उस संगठन के कार्यकर्ताओं में तिरस्कार और द्वेष की भावना का निर्माण कर दो, इससे पदाधिकारी अपने महत्वकांक्षा और कार्यकर्ता आपसी टकराव के लिए काम करेगा। बिना कुछ किये ही यह संगठन तबाह और बर्बाद हो जायेगा। इस बात से सीख मिलती है कि कार्यकर्ताओं में तिरस्कार और द्वेष की भावना के बजाय आपसी समन्वय की भावना होनी चाहिए।"
आजादी अनुशासन में रहने वालेV लोगों ने ही हासिल की है। दुनिया में जहाँ भी क्रांतियां हुईं हैं, उनमें अधिकतम 5 प्रतिशत लोग कैडर थे, बाकी सभी क्राउड वाले लोग शामिल थे।
नेतृत्व एवं नेतागीरी में अंतर प्रदेश व जिलों में संगठन के जितने भी कार्यकर्ता व पदाधिकारी हैं, जैसे-अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव, कोषाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी इत्यादि, तो संगठन के पदाधिकारी कार्यकर्ता सोचते हैं कि मैं लीडर हो गया, मैं जिले का अध्यक्ष व प्रदेश का अध्यक्ष हूँ। जो कहूँगा, वही होगा, ऐसा सोचने लगते हैं। मगर यह जो पद है, जिस कार्य के लिए पदाधिकारी बनाया गया है, जिस मकसद के लिए पद दिया गया है, वह पद कोई नेतागिरी का नहीं है। हमारे कार्यकर्ता पद को ही लीडरशिप समझ लेते हैं। जबकि यह पद लीडरशिप पैदा करने के लिए दिया जा रहा है। ताकि कार्यकर्ताओं के अन्दर लीडरशिप पैदा हो सके। चूंकि लीडरशिप व्यक्तिगत शक्ति होती है तथा पद दी हुई शक्ति होती है। दी हुई शक्ति कभी भी छीनी जा सकती है। जबकि व्यक्तिगत शक्ति कभी नहीं छीनी जा सकती है। अगर हम अपने अन्दर लीडरशिप का गुण पैदा करते हैं, अर्थात अपने अंदर विशेषता का निर्माण करते हैं, तो उसे कभी भी छीना नहीं जा सकता है। अगर आपका जो पद है,  उसे आप अपने से अनुभवी व्यक्ति को ट्रांसफर कर सकते हैं, अर्थात उस पर योग्य व्यक्ति को बिठाकर संगठन का विकास कर सकते हैं। कार्यकर्ता को दायरे में रहकर कार्य करना एवं भाषण देना-एक ख़ास बात यह है कि जो कार्यकर्ता, जिस भी जिले में काम करेंगे, वह उद्देश्य व सिद्धान्त को ध्यान में रखकर काम करेंगे। इस संगठन की जो कार्यकरणी है, उसके दायरे में रहकर ही कार्यकर्ताओं को काम करना होगा। अगर कार्यकर्ता संगठन की कार्यप्रणाली के दायरे से हटकर काम करते हैं, तो कार्यकर्ताओं की अहमियत अपने आप खत्म हो जाती है। संगठन जो कार्यप्रणाली बनाकर देता है, उसी कार्यप्रणाली पर काम करना है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि संगठन ने जो काम करने के लिए मना किया है, वह भी आप करने लगते हैं। संगठन यह कभी नहीं कहता कि आप समाज में जाओ और 33 करोड़ देवी देवताओं का चीरफाड़ करो, भाग्य-भगवान पर चर्चा करो, संगठन ऐसा भी अनुमति नहीं देता है।