6 फरवरी 2018 दिन मंगलवार को तहसील दिवस के अवसर पर प्रदेश के समस्त तहसीलो पर

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्ट, 5 फरवरी 2018। उत्तर प्रदेश में प्रदेशव्यापी तहसील दिवस अधिकारी महोदय के समक्ष ज्ञापन देने की कड़ी में निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के नेतृत्व में संवैधानिक अधिकारों से वंचित मछुआ समुदाय के लोगों द्वारा ज्ञापन दिया जाएगा। भाजपा सरकार निषादो के आरक्षण का वादा पूरा नहीं कर रही है बल्कि सरकार द्वारा जारी शासनादेश एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी तहसीलों में निषादों का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है। मछुआ समुदाय के लोगों का नाम ओबीसी की सूची से निकालकर अनुसूचित जाति की सभी सुविधा देने का आदेश क्रमिक मंत्रालय से शासनादेश जारी है। माननीय उच्च न्यायालय हाई कोर्ट इलाहाबाद में स्टे भी खारिज कर दिया है। मछुआ समुदाय को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है ना ही सुविधा। जबकि 12-01-2017 को सभी संबंधित विभागों को क्रमिक मंत्रालय से शासनादेश आ चुका है फिर भी तहसील के कर्मचारी मछुआ समुदाय को गुमराह कर  ओबीसी का प्रमाण पत्र बना रहे हैं जो सरासर गलत है। यह संविधान एवं माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। 54 हजार करोड़ का बजट केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति के विकास के लिए पास हुआ है, जिसके अंदर मछुआ समुदाय का भी हिस्सा है। कल दिनांक 6.02.2018 को प्रदेशव्यापी स्तर पर सभी तहसीलों पर ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दिया जाएगा कि अगर तत्काल शासनादेश एवं माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होता है तो उत्तर प्रदेश में होने वाली सरकारी नौकरियों से मछुआ समुदाय के लोग वंचित हो जाएंगे। मछुआ समुदाय एक मार्शल कौम है, जिसका गौरवशाली इतिहास रहा हैं। आर्यों, मुगलों, अंग्रेजों से लड़कर देश को आजाद कराया है आज सामाजिक बुराई एवं कुरूतियों में फंसा हुआ है शिक्षा का आभाव होने के कारण अपने  संवैधानिक अधिकारों को नहीं जानता था। निषाद पार्टी के कैडर से मछुआ समुदाय के लोगों में जागृति से जानकार हुए।  मछुआ समुदाय मझवार, गोड़, तुरैहा, बाथम आदि नाम से संविधान को सूची में सूचीबद्ध है। आज तहसील दिवस में जैसे अंबेडकरवादीयो ने राजनैतिक हथियार से अपना हिस्सा लिया वैसे ही निषादवादी लोग राजनैतिक हथियार से अपना हिस्सा लेंगे। कल तहसील दिवस में प्रदेशव्यापी स्तर पर तहसीलों में ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी देगें कि तत्काल दिनांक 21/12/2016 एवं 22/12/2016 और 31/12/2016 तथा 12/01/2017 का शासनादेश एवं 29/03/2017 के माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं हुआ तो यह मछुआ समुदाय तहसीलों के सामने ही उग्र धरना प्रदर्शन एवं आमरण अनशन करने को मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी तहसील प्रशासन की होगी। जिसमें काफी संख्या में महिला, पुरुष, नौजवान, शामिल होंगे।

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