योगी सरकार में भी वन विभाग के आला अधिकारियों की कमी से धड़ल्ले से हरे पेड़ों पर चल रही हैं आरियां

फतेहपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर राम बाबू निषाद की रिपोर्ट, 27 फरवरी 2018। जहाँ एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षित को लेकर अरबों रुपया पानी की तरह बहा रही है, जंगलो को सुरक्षित रखने की दिशा में नए-नए कानून बनाकर कानून के रखवालों का अधिकार क्षेत्र बढ़ा रही है। किन्तु इसका अनुपालन कितना किया जा रहा है, इसकी उच्चस्तरीय जांच करा ली जाए तो दूध का दूध पानी का पानी निकल आएगा।
एक ओर योगी सरकार अपराध व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में सख्ती बरत रही है किंतु सरकार की ये पहल कितनी कामयाब है इसकी बानगी थाना कल्याणपुर क्षेत्र से लिया जा सकता है, जहाँ लकडकट्टो की एक लंबी लाइन लग गयी है। जो जंगल का सफाया करने में तुले हुए हैं। जिसकी बानगी मानिकपुर जंगल से ली जा सकती है। कागजों में तो जंगल दर्ज है किंतु मौके पर जंगल का नामोनिशान तक नही बचा है।
   हम पके फल वालो की बात करें तो उपरोक्त जंगल में वेशकीमती पेड़ व फलदार पेड़ जंगल की शान कहे जाते थे, किन्तु आज मौके पर जड़ सहित गायब हैं। विडंबना है कि इन हरे भरे पेड़ो को सुरक्षित रखने का जिम्मा वन विभाग के अधिकारियों को रखवाली के रूप में सौंपा गया। किन्तु इन्ही रखवालों की गैर जिम्मेदाराना कार्य प्रणाली से प्रश्न चिन्ह लग कर रह गया है ? इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कल्याणपुर थाना क्षेत्र के पालिखेड़ा गांव में लकड़ी माफिया द्वारा हरेभरे नीम के पेड़ पर आरी चलवा दी नतीजन उस पेड़ के हिस्से से जान माल का नुकसान होते होते बचा। मामले को बढ़ता देख वन विभाग ने शमन शुल्क काट कर अपनी कार्यवाही पूरी की। जब इस मामले में स्थानीय वन विभाग कर्मी से जानकारी मांगी गई तो शमन शुल्क काटने की बात बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जिससे साफ पता चलता है कि इन लकड़ी माफियाओ के हाथ वन विभाग के अधिकारियों की अच्छी पकड़ से बड़े-बड़े जंगल गायब हो रहे हैं।