विषय:- समाजवादी पार्टी और निषाद पार्टी का गठबंधन, निषाद पार्टी का भविष्य और निषाद समुदाय की अपेक्षायें...

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश सोशल मीडिया ब्यूरो रिपोर्ट, 15 फरवरी 2018। अगले महीने उत्तर प्रदेश में 2 लोकसभा सीटों पर उप चुनाव होने वाले हैं जिसमें गोरखपुर लोकसभा बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सांसद रह चुके हैं और यह सीट भाजपा ,वर्तमान केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की नीतियों और हिंदुत्व की राजनीति के लिए चुनौती है। ऐसे में समाजवादी पार्टी और निषाद पार्टी के बीच होने वाला गठबंधन बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है ।अगर देखा जाए तो निषाद पार्टी के तरफ से उठाया गया यह अब तक का बेहतरीन कदम है। अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसे में इन उपचुनाव के परिणाम अगले लोकसभा चुनाव के रुझानों की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करा सकते हैं।

विगत वर्षों में निषाद समुदाय के लोगों ने कभी किसी विशेष पार्टी को एकत्रित होकर वोट नहीं दिया है कहीं पर निषाद समुदाय के लोगों ने भाजपा को कहीं पर बसपा को और कहीं पर सपा को वोट दिया है लेकिन निषाद पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद से निषाद समुदाय के वोटों का एकत्रीकरण हुआ है ऐसे में इन वोटों का समाजवादी पार्टी को मिलना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि पूरा निषाद समुदाय इस गठबंधन को ही वोट करेगा। क्योंकि अभी भाजपा के द्वारा अपना प्रत्याशी घोषित किया जाना बाकी है। और निषाद समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा सांप्रदायिक राजनीति करने में दिलचस्पी रखता है।

वर्तमान में जिस तरह से सांप्रदायिकता लगातार बढ़ रही है और इसे लगातार सरकारी संरक्षण मिल रहा है। लगातार हिंदू और मुस्लिम के बीच अलगाव पैदा करने की कोशिश हो रही है और राजनीति में धर्म का प्रभाव बढ़ता जा रहा है तथा धर्म को राजनीति के आगे खड़ा किया जा रहा है। जिस तरह से लगातार धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की हत्या की जा रही है संविधान पर लगातार प्रहार किया जा रहा है और केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा कारपोरेट सेक्टर को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों को लागू किया जा रहा है ऐसे में निषाद पार्टी और समाजवादी पार्टी का साथ आना पूर्वांचल की राजनीति को बदल सकता है।

इस गठबंधन का असर निषाद पार्टी पर भी पड़ेगा  इस परिपेक्ष में हम यह आशा कर सकते हैं कि निषाद पार्टी के कार्यकर्ता हिंदू और मुस्लिम के बीच सद्भाव को बढ़ावा देंगे, राम मंदिर के नाम पर उग्र नहीं होंगे ,"हिंदू धर्म खतरे में है" इससे उनको बहकाया नहीं जा सकेगा 

निषाद पार्टी का पूरा उभार आरक्षण को लेकर हुआ है और जो समाजवादी पार्टी के साथ निषाद पार्टी का गठबंधन हुआ है ऐसे में सत्ता पक्ष का निषाद पार्टी के विरुद्ध नकारात्मक नजरिया हो सकता है और जो लड़ाई आरक्षण की लड़ी जा रही है वह तो जारी रहेगी लेकिन आरक्षण मिलने की संभावना इससे छीड़ हो जाएगी लेकिन इससे बड़ी जो चीज है वह है बढ़ रही सांप्रदायिकता के खिलाफ खड़े होने की ,लगातार संविधान पर होनेवाले आघात के खिलाफ खड़े होने की, किसानों के साथ खड़े होने की, जवानों के साथ खड़े होने की , शिक्षा स्वास्थ्य बेरोजगारी के सवाल पर खड़े होने की और समाज को एक वैचारिक आधार देने की जिसमें सद्भावना हो और सभी वर्गों और धर्मों के लोग मिल जुल कर रहे। क्योंकि आरक्षण तो आपको एक दिन मिल ही जाएगा जब आप गठबंधन के साथ सत्ता में आएंगे लेकिन अगर देश का माहौल सांप्रदायिक हो गया तो फिर आप उस आरक्षण का कोई फायदा नहीं उठा पाएंगे ऐसे में जरूरी है कि हम धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के साथ खड़े होए

निषाद पार्टी एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है उसकी संख्या भारत की कुल जनसंख्या का एक बहुत ही छोटा हिस्सा है ऐसे में निषाद पार्टी के अस्तित्व के लिए जरूरी है कि वह किसी पार्टी के साथ गठबंधन करें क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करते तो भविष्य में ऐसा भी हो सकता था कि दूसरी पार्टियों यह न मान ले कि इस समुदाय का वोट हमारा नहीं है ऐसे में हम अलग थलग पड जाते इस प्रकार यह गठबंधन निषाद पार्टी के भविष्य के लिए अच्छा है और निषाद पार्टी को भविष्य में इससे एक मजबूत आधार मिलेगा। अगर निषाद पार्टी सपा के साथ गठबन्धन के बलबूते यह सीट जीत लेती है तो उसे प्रादेशिक स्तर पर उभरने में बहुत ही मदद मिलेगी

उन सबके बीच एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है वह है निषाद समाज में विद्यमान समस्याएं। क्योंकि उन्हें दूर करना निषाद पार्टी के लिए राजनीति करने से ज्यादा जरूरी है ऐसे में महत्वपूर्ण हो जाता है कि आने वाले दिनों में निषाद पार्टी निषाद समुदाय के बीच कितना काम करती है और उससे जुड़े हितों पर कितना ध्यान देती हैं। अगर निषाद पार्टी निषाद समुदाय से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए अग्रसर होती है तो इससे निषाद पार्टी को अन्य अति पिछड़े हुए समुदायों को अपने साथ जोड़ने में मदद मिलेगी। इस गठबंधन के होने के बाद निषाद समुदाय की अपेक्षाएं निषाद पार्टी से बढ़ जाती है अब निषाद समुदाय के लोग यह अपेक्षा रखेंगे कि उनकी बात गंभीरता से सुनी जाएगी और लोग उनकी आंदोलनों को गंभीरता से लेंगे और समाज में जो समस्याएं विद्यमान हैं उन को दूर करने के लिए और लोग आगे आएंगे। साथी साथ निषाद पार्टी जिन मुद्दों को लेकर आगे बढ़ी है उन को अमलीजामा पहनाने के लिए आगे आएगी।