मानव श्रृंखला के भेट चढ़ी छात्रा की सर्वदलीय श्रधांजलि मार्च में भारी जुटी संख्या

सोनभद्र, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो चीफ राम विलास निषाद की रिपोर्ट, 4 फरवरी 2018। सर्वदलीय श्रधांजलि मार्च में भारी संख्या में सभी दल के नेतागण, समाजसेवी, अधिवक्ता, महिला, युवा, छात्रों ने सहभागिता दर्ज कराते हुए मानव श्रृंखला के भेट चढ़ी कक्षा 3 की 8 वर्षीय छात्रा मृत बबिता को श्रधांजलि दी। शनिवार को शाम 6 बजे चाचा नेहरू पार्क से कैंडिल जलाकर स्वर्ण जयंती चौराहे तक मार्च करते हुए बढ़ौली चौराहे पर पहुच कर शोक सभा कर श्रधांजलि दी गई। लेकिन आक्रोश इस बात का है कि जिलाधिकारी ने जनपद की जनता के साथ विश्वासघात किया। वर्ल्ड रिकार्ड गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के नाम का झुठठा भ्रम फैला कर सोनभद्र के जनता की प्रतिष्ठा से जोड़ कर लिया खुद के नाम का श्रेय वो भी एक हरियाणा के एनजीओ इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड से। कल के मुवावजे की मांग के लिए गिरफ्तारी फिर धरना प्रदर्शनकारियों ने छोटी बच्ची बबिता के मौत का जिम्मेदार जिलाधिकारी को बताया और कहा कि जनपद की जनता के मन में तमाम सवाल हैं, जिनका जवाब जिलाधिकारी को देना होगा-
1- मानवाधिकार का घोर उलंघन-प्राथमिक विद्यालयों के छोटे बच्चों को बलपूर्वक मानव श्रृंखला में खड़ा किया गया, ग्रमीण इलाकों के बच्चे 4-5 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक आये, चार घंटे कड़ी धूप में खड़े रहे, पानी के अभाव में कई बच्चे बेहोश हो गए जिन्हें अस्पताल भी नहीं ले जाया गया। जो नियम विरुद्ध व घोर अमानवीय कदम है। लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व चुनाव में भी हाईवे अवरुद्ध नही किया जाता है। सोनभद्र चार अन्य प्रदेशों को भी जोड़ता है। मार्ग अवरुद्ध किये जाने से ना सिर्फ लाखो यात्रियों को परेशानी हुई बल्कि मरीजो को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह कदम नियम विरुद्ध व जनहित के विरुद्ध है। राबर्टसगंज रेलवे स्टेशन पर दो महत्वपूर्ण ट्रेनें आधे घंटे से ज्यादा रोक दी गयी और लाखों यात्रियों को वहां भी असुविधा उठानी पड़ी। प्रशासन का यह कदम नियम विरुद्ध व जनहित के विरुद्ध है। दुर्वेवस्था इतनी ज्यादा थी कि कई मरीज व शव वाहन भटकते रहे। जिससे जनता को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रशासन का यह कदम भी अमानवीय नियम विरुद्ध है। 
2- दुःखद घटनाओं के मुवावजा की मांग― मानव श्रृंखला में भाग लेने हेतु हिन्दुआरी लाई गयी ग्राम बरवन की 8 वर्षीय बच्ची, बबिता की दुर्व्यवस्था से दुर्घटना में मौत हो गई। जो दुःखद है और हम उनके परिजनों के लिए 20 लाख रुपये के मुवावजे की मांग करते हैं। मानव श्रृंखला में भाग लेने हेतु लाई गयी चोपन क्षेत्र के भभाइच की बालिका पुष्पा दुर्घनाग्रस्त व घायल होकर जिला अस्पताल में अब तक भर्ती है, उसके सही इलाज की समुचित व्यवस्था के लिए एक लाख रुपए मुवावजा की मांग करते हैं। घोरावल क्षेत्र वोदार के पास मानव श्रृंखला में भाग लेने हेतु लाए गए प्राथमिक विद्यालय के छोटे बच्चे करन 8 वर्ष, अंजनी 10 वर्ष, पूजा 9 वर्ष, रीना 10 वर्ष, सतेंद्र 10 वर्ष, नीतू 7 वर्ष, विकास 8 वर्ष, शिव 7 वर्ष, अर्चना सात वर्ष, सुनैना 8 वर्ष, रेखा 6 वर्ष, वहां भौरों के आक्रमण से घायल हुए छोटे बच्चों को 25 हज़ार रूपए का मुवावजा दिया जाय।
3- जिला प्रशासन से अपील―  जिला प्रशासन मानव श्रृंखला 2 फरवरी 2018 पर एक स्वेत पत्र जारी करे। जिसमे स्पष्ठ करे, कि इस मानव श्रृंखला से जनपद का क्या लाभ हुआ। जिला प्रशासन यह स्पष्ठ करें कि पिछले 15 दिनों से सारी सरकारी मशीनरी सरकार की योजनावो के क्रियान्वयन को छोड़ मानव श्रृंखला के प्रचार प्रसार में लगी हुई थी। जिलाधिकारी ये स्पष्ठ करें, कि सरकार के किस आदेश, दिशा निर्देश के क्रम में यह किया जा रहा था। जिला प्रशासन यह स्पष्ठ करे कि मानव श्रृंखला के क्रियान्यवयन में कुल कितना धन व्यय हुआ और जिला प्रशासन को वह धन किन स्रोतों से प्राप्त हुआ। डीएम ये स्पष्ठ करें, कि उसने सोनभद्र के कुल कितने गावो को खुले से शौच मुक्त कर दिया और वो सभी घोषित गांव क्या वास्तव में खुले में शौच मुक्त हो गए हैं। जिला प्रशासन उस आदेश की प्रति उपलब्ध कराए कि ये किसके आदेश से हाईवे और ट्रेन रोकी गईं। जिला प्रशासन ये सुनिश्चित करे कि किसके आदेश से छोटे बच्चों को 4 घंटे तक कड़े धूप में खड़ा किया गया। 
4–आरोप― यह जनपद हित में नहीं है। डीएम द्वारा अतिमहत्वकांक्षा में व्यक्क्तिगत हित में किया गया कार्य है और प्रमाण पत्र भी जनपद के नाम नहीं, वल्कि जिलाधिकारी महोदय अपने व्यक्तिगत नाम से लिया है। पूरे जनपद में इस बात का दुष्प्रचार फैलाया गया, कि यह मानव श्रृंखला गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल होगी। जिसे लेकर पूरे जनपद में उत्साह था। क्यों कि सोनभद्र की जनता विश्व पटल पर जनपद का नाम देखकर गौरवान्वित चाहती थी। किंतु गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के सदस्यों को इसकी सूचना ही नहीं दी गयी थी और उसका कोई प्रतिनिधि भी यहाँ नही आया था। वल्कि हरियाणा के एक निजी संस्था द्वारा प्रमाण पत्र लेकर सस्ती लोकप्रियता बटोरने की कोशिश की गई। प्रमाणपत्र निर्गत करने वाली संस्था इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड के प्रमाण पत्र पर अध्यक्ष के हस्ताक्षर हैं। जबकि सोनभद्र में उनके प्रतिनिधि उपस्थित थे। स्पष्ठ है प्रमाण पत्र पहले से बनकर आया था। इसी वजह से उसमें किलोमीटर की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया। स्पष्ठ है कि यह सोनभद्र की 21 लाख जनता के साथ धोखा है। राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन का सहारा लेकर डीएम सोनभद्र ने अपने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की पूर्ति की है। और सरकारी धन, सरकारी समय, जनता के श्रम और बच्चों की तपस्या का बेजा इस्तेमाल किया है। जो घोर निंदनीय है। हम सब पी आई एल के साथ साथ मा.राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मा.राज्यपाल व मानवाधिकार आयोग से जांच कराने की उचित कार्यवाई की मांग करेंगे। हम सब हर उस व्यक्ति की ऐसी महत्वकांक्षा का विरोध करेंगे जो जनहित में अन्यायपूर्ण हो, इसके लिए हम कटिबद्ध हैं।