अपने अधिकार को समझदारी पूर्वक लेने की जगह ऐसे लोगों से उम्मीद लगाये बैठे हैं जिन्होंने युगों युगों से हमे मुर्ख बनाया है

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 14 फरबरी 2018। जिस प्रकार पुराणों में हमें अयोध्या नगरी जैसी विशालकाय नगर श्रृंगवेरपुर के रहते हुए भी राम के समक्ष एक जंगलवाशी की तरह प्रस्तुत कर नाटकीय ढंग से विलुप्त करने का कार्य पुराण वेत्याओ ने किया हैं। उसी तरह से आज भी गणतंत्रीय व्यवस्था में मताधिकार का महत्व हम खुद नहीं समझकर दूसरों के बहकाये में आकर आजके अपने अधिकार को समझदारी पूर्वक लेने की जगह ऐसे लोगों से उम्मीद लगाये बैठे हैं, जिन्होंने युगों युगों से हमें मुर्ख बनाया है।
अयोध्या में रामजन्म हुआ, किस जगह हुआ किसी रघुवंशी व् पुराण वेत्याओ को आजतक मालूम नहीं हैं। आज कोर्ट से लेकर मस्जिदों तक के सामने गुहार लगाते फिर रहे हैं। कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक मठो में अथाह सम्पति से लेकर प्रगाढ़ पांडित्यओ व् केंद्र से लेकर अनेकों राज्यो में शासन। फिर भी रामजन्म स्थली व् राम मंदिर बनाने के लिए हम आप जैसे लोग चाहिए ?? । 
निषाद वंशीय खुद के लिए सोचिये। क्या है आपके पास ? आपके 95% लोगो के पास अशिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी, घासफूस की मढ़ई!!
आपके पूर्वजों का विशालकाय खंडहर रूपी श्रृंगवेरपुर का वीरान तड़पता हुआ श्रीग़वेरपुर का किला !! बंधुओ इस खंडहर को तो व्यवस्ति कर नहीं सके हम चले हैं पुरुषोत्तम का घर बनाने!
आप का जो है उसको ब्यवस्थित कर लीजिये। घर रहेगा तो मंदिर भी बना लीजियेगा। अगर हम अपनों का व्  पूर्वजों का मान सम्मान नहीं बचा सकते हैं तो।
न मित्र से मित्रता निभा सकते हैं, नाही अपने ईश्वर संग इष्टता निभा सकते हैं। उनको अपना कार्य करने दीजिये, आप अपना कार्य कीजिये। बंधुवर!!
निर्जीव बस भी किलोमीटर के हिसाब से अपना मेहनताना ले लेती हैं।
सजीव शासको से बिन कीमत अगर आप अधिकार लेना चाहते हैं,  तो सपना देखते रहिये।
(साभार मल्लाह महेंद्र निषाद की वाल से लिया गया)

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