डॉ संजय निषाद एक करिश्माई हैं अपने लोगों को लड़ना सिखा कर अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश सोशल मीडिया रिपोर्ट, 9 फरवरी 2018। डॉ संजय निषाद सरकार से लड़ रहे हैं, अपने तरीके से, अपने लोगो के साथ और अपने लोगों के लिए। यह उस जमात के लिए किसी आशीर्वाद के फलीभूत होने जैसा है, जिस जमात को मुख्यधारा की राजनीति ने सिर्फ अब तक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया और कही जगह नहीं दी। सामाजिक स्तर पर यह जमात सरकारी नौकरियों में लगभग है ही नहीं। उद्योग, धंधा, भी नहीं है। 90 प्रतिशत इस जमात के लोग असंगठित छेत्र में सिर्फ मजदूर हैं, जहाँ इनके शोषण की भरपूर संभावना बनी रहती है।
            सीमित साधनों के साथ डॉ संजय निषाद की यह यात्रा एक करिश्मा है। वह अपने लोगों को लड़ना सिखा रहे हैं। अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।अपने नौजवानों के लिए मंच मुहैया करा रहे हैं। यह बहुत बड़ी क्रांति है। यह परिणाम देने वाला बदलाव है। फिर इससे कौन लड़ रहा है। विरोध के उठने वाले स्वर का उद्देश्य क्या है। और इनकी परिणीति क्या है। मेरी दृष्टि में डॉ संजय का विरोध मूल्यहीन है। क्योंकि यह बदले की भावना और जलन के लिए है। इसका कोई सैद्धांतिक आधार नहीं है। मेरी यह बात उन मित्रों के लिए है, जो सोसल मिडिया पर सिर्फ इसलिए सक्रीय हैं ताकि डॉ संजय निषाद को गाली दे सकें। मुझे आप से यही कहना है कि स्वाभिमान और अधिकार के लिए उठी डॉ संजय की गर्दन झुकने वाली नहीं है।
(हर गोविंद मल्लाह की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया)

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